नाद्दूर में सन्नाटा,समझाइश के बाद शव लेने को तैयार हुए परिजन

नाद्दूर गांव में सोमवार की सुबह लोगों की नींद बुरी खबर सुनने के साथ खुली। तडके साढ़े पांच बजे गांव के तीन मकानों के ऊपर भरभरा कर दीवार गिरी तो आवाज सुन कर अनहोनी की आशंका में घबराए हुए पड़ोसी तत्काल घरों से निकले। बाहर आकर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।मोहल्ले के तीन केलूपोश मकानों पर पास ही करीब १० फीट दीवार गिरी पड़ी थी।मकानों के बड़े हिस्से मलबे में दबे हुए थे।

By: Dilip

Published: 03 Dec 2019, 01:52 PM IST

कोयम्बत्तूर. नाद्दूर गांव में सोमवार की सुबह लोगों की नींद बुरी खबर सुनने के साथ खुली। तडके साढ़े पांच बजे गांव के तीन मकानों के ऊपर भरभरा कर दीवार गिरी तो आवाज सुन कर अनहोनी की आशंका में घबराए हुए पड़ोसी तत्काल घरों से निकले। बाहर आकर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।मोहल्ले के तीन केलूपोश मकानों पर पास ही करीब १० फीट दीवार गिरी पड़ी थी।मकानों के बड़े हिस्से मलबे में दबे हुए थे। मलबे में से चीख-पुकार की आवाजें आ रही थी। पड़ोसियों ने पुलिस को फोन कर तेजी से मलबे को हटाना शुरु किया।
लेकिन साधन नहीं होने से वे मलबे में दबे लोगों को निकाल नहीं पा रहे थे। खबर मिलने पर पुलिस , आपदा बचाव कर्मी जेसीबी के साथ पहुंचे। मलबा हटाना शुरु किया तो एक के बाद एक सत्रह लोगों के शवों को देख लोग सन्न रह गए। महिलाओं की रूलाई फूट पड़ी। सोशल मीडिया के जरिए खबर आग की तरह फैल गई।जिला कलक्टर राजामणि , जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार मौके पर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया।
गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि दीवार गिरने से हादसा हुआ है। दीवार भी बिना अनुमति के बनाई गई है।उन्होंने भूमि मालिक सुब्रहमण्यम के खिलाफ मामला दर्जकरने की मांग की। करीब पांच सौ युवाओं ने मेट्टपालयम रोड को जाम कर दिया। यहां करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा।दूसरी ओर अस्पताल में कईमृतकों के परिजनों ने शवों को लेने से मना कर दिया।
लोगों के रोष को देखते हुए जिला कलक्टर ने ग्रामीणों को बातचीत के लिए बुलाया। पुलिस उपमहानिरीक्षक पैरिय्याह , स्थानीय विधायक भी इस दौरान मौजूद थे। ग्रामीणों की मांग थी कि चार लाख की आर्थिक सहायता नाकाफी है।
इसे बढ़ा कर २५ लाख किया जाए। हताहतों के एक परिजन को सरकारी नौकरी मिले। कलक्टर ने कहा कि वे राज्य सरकार को इस बारे में पत्र भेज रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण की ओर प्रशासन ध्यान नहीं देता।
अगर दीवार का निर्माण रुकवा दिया जाता तो हादसा टल सकता था। अधिकारियों ने कहा कि सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा।विधायक ने भी समझाइश की। आखिर मृतकों के परिजन शवों को लेने के लिए तैयार हो गए। सोमवार को पूरे गांव में सन्नाटा छाया रहा। रह-रह कर मृतकों के परिजनों की रुलाई लोगों को गमजदा करती रही।

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