नीलगिरि में छोटे काश्तकार करते हैं 70 फीसदी चाय का उत्पादन

नीलगिरि जिले में सच्चर फीसदी चाय का उत्पादन छोटे किसान करते हैं। पर इन्हें कभी समर्थन मूल्य नहीं मिलता।

By: Dilip

Published: 23 May 2020, 12:43 PM IST

कोयम्बत्तूर. पर्यटन, चाय बागान व सब्जी की खेती नीलगिरि जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है पर लॉकडाउन के दौरान तीनों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटन व्यवसाय ठप है। मांग के बाद भी सब्जी की केरल व दूसरे शहरों में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही। यहीं हालत चाय उत्पादक किसानों की है। नीलगिरि जिले में सच्चर फीसदी चाय का उत्पादन छोटे किसान करते हैं। पर इन्हें कभी समर्थन मूल्य नहीं मिलता।

भुगतान में देरी
चाय किसान मुरुगन ने बताया कि हालांकि हर साल चाय दिवस मनाया जाता है पर छोटे किसानों की तकलीफों के बारे में कोईबात नहीं होती।हालत यह है कि प्रोसेस इकाइयां से भुगतान भी देरी से मिलता है।आम लोग समझते है कि चाय तो हरा सोना है, लेकिन ये छोटे किसानों के लिए सही नहीं है।

टी बोर्ड का प्रस्ताव भी नहीं माना
टी बोर्ड ने अपने बैठक में हरी पत्ती के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का प्रस्ताव पारित किया था। बोर्ड ने आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव को वाणिज्य मंत्रालय भेज दिया। पर वहां मामला विचाराधीन है। देश में हरी पत्ती की चाय का लगभग 50फीसदी उत्पादन छोटे चाय किसान करते हैं और नीलगिरि में यह आकंड़ा ७० फीसदी है।

Dilip Reporting
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