त्याग रूपी साधना जरूरी : मुनि

साधना और त्याग की प्रति मूर्ति थे गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वर महाजराज। उनकी साधना ने आज उन्हें विश्व पूजनीय बना दिया। मोदरा मांगीतुंगी की पहाडिय़ों में जिसने साधना में वर्षों व्यतीत किए, ऐसे पुण्य संत के आज पावन दिवस पर हम अपने को सौभाग्यशाली मान रहे हैं।

By: brajesh tiwari

Published: 17 Jun 2020, 11:33 AM IST

सेलम. साधना और त्याग की प्रति मूर्ति थे गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वर महाजराज। उनकी साधना ने आज उन्हें विश्व पूजनीय बना दिया। मोदरा मांगीतुंगी की पहाडिय़ों में जिसने साधना में वर्षों व्यतीत किए, ऐसे पुण्य संत के आज पावन दिवस पर हम अपने को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। यह विचार संत मालवा केशरी मुनि हितेशचंद्र विजय महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहे। मुनि ने कहा कि वर्तमान में आज गुरु गादी की इतनी ख्याती बढ़ रही है, यह गुरु के त्याग का परिणाम है।

शिथलाचार के बड़ते उस दौर में त्याग एवं सहवाचार की एक अलग ज्योति जगानेे वाले गुरु ने संवत 1925 में एक अनुठी पहल शुद्ध सम्यवत की पावन ज्योति जलाई थी। क्रियोद्वार के पावन अवसर पर राजेंद्र सूरीश्वर जैन ट्रस्ट द्वारा गुरु पूजा कराई जा रही है। अनकी झांकी बनाई जा रही है। गुरु के नाम का अखंड जाप किया जा रहा है। गुरु के उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए। गुरु की महिमा अपरमपार है। आज गुरु का त्याग दिवस है। हमे भी त्याग रूपी साधना करना चाहिए।

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brajesh tiwari Desk
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