चाय किसानों को चाहिए समर्थन मूल्य

पर्यटन, चाय बागान व सब्जी की खेती नीलगिरि जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है पर लॉकडाउन के दौरान तीनों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटन व्यवसाय ठप है। मांग के बाद भी सब्जी की केरल व दूसरे शहरों में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही।

By: Dilip

Published: 23 May 2020, 12:37 PM IST

कोयम्बत्तूर. पर्यटन, चाय बागान व सब्जी की खेती नीलगिरि जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है पर लॉकडाउन के दौरान तीनों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटन व्यवसाय ठप है। मांग के बाद भी सब्जी की केरल व दूसरे शहरों में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही। यहीं हालत चाय उत्पादक किसानों की है। नीलगिरि जिले में सच्चर फीसदी चाय का उत्पादन छोटे किसान करते हैं। पर इन्हें कभी समर्थन मूल्य नहीं मिलता। इन्हें अपनी हरी पत्तियां प्रोसेस करने वाली इकाइयों को बेचनी पड़ती है। यहां भी कमोबेस दर प्रोसेस इकाइयां ही तय करती है।नीलगिरी की चाय अपने रंग व ऊर्जा के लिएप्रसिद्ध है।

हरी पत्ती की कीमत मात्र 15 रुपए किलो तक
केट्टी के चाय किसान दुुर्गेश्वरन ने बताया कि छोटे चाय उत्पादक पिछले एक दशक से अपनी उपज के लिए च्न्यूनतम समर्थन मूल्यज् के लिए लड़ रहे हैं ,लेकिन व्यर्थ हैं। कुन्नूर के चाय किसान राजेश ने कहा, हरी पत्ती चाय की कीमत मात्र14 -15 रुपये किलो के बीच है। ऐसे में किसान की हालत समझी जा सकती है।

Dilip Reporting
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