मोबाइल गेमिंग से कट रहा समय

बिहार के नालंदा के रहने वाले भुवन मंडल यहां दो माह पहले ही फर्नीचर के काम के लिए आए। काम मिल भी गया पैसा अच्छा मिल रहा था।घर वाले भी खुश थे,पर अचानक कोरोना ने सब गुड़ गोबर कर दिया। फिलहाल मोबाइल से मन बहला रहा है। पहले पबजी और दूसरे गेम के बारे में पता नहीं था। अब खेल रहे हैं। मोबाइल पर घर वालों की खैर खबर मिल जाती है।

कोयम्बत्तूर. लॉकडाउन का गुरुवार को दूसरा दिन है और वक्त काटे से नहीं कट रहा। दिहाड़ी तो गईही समझो ,घर -परिवार से हजारों किलोमीटर दूर अटके पड़े हैं। बिहार के नालंदा के रहने वाले भुवन मंडल यहां दो माह पहले ही फर्नीचर के काम के लिए आए। काम मिल भी गया पैसा अच्छा मिल रहा था।घर वाले भी खुश थे,पर अचानक कोरोना ने सब गुड़ गोबर कर दिया। फिलहाल मोबाइल से मन बहला रहा है। पहले पबजी और दूसरे गेम के बारे में पता नहीं था। अब खेल रहे हैं। मोबाइल पर घर वालों की खैर खबर मिल जाती है।
मूवी का शौक अब हो रहा पूरा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी जेपी सिंह का कहना है कि पहले फिल्मों का शौक था पर घर की जिम्मेदारी के बाद छूट गया। कोरोना और मोबाइल की वजह से अब फिर ये शौक पूरा हो रहा है। मजे की बात है कि मोबाइल पर हॉलीवुड से लेकर कॉलीवुड तक की हिन्दी डब फिल्में मौजूद हैं। दिन में एक-दो फिल्में तो देख रहे हैं। टीवी चैनलों के जरिए ताजातरीन समाचार मिल जाते हैं।
सोशल मीडिया से हो रहा टाइम पास
असम के जोरहाट निवासी वीरेन्द्र का कहना है कि वे एक माल में काम करते हैं, जो फिलहाल बंद है। फिलहाल मोबाइल ही सच्चा दोस्त साबित हो रहा है।घर -गांव के हालातों के वीडियो मिल रहे हैं। देश -दुनिया का पता सैकण्डों में लग रहा है।सबके वीडियो हैं। हंसी -मजाक के लिए टिक टॉक है। बाकी सोशल मीडिया पर टाइम पास हो रहा है।

Dilip Reporting
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