मंदी के दौर में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम जले पर नमक छिडकने जैसा

मंदी के दौर में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम जले पर नमक छिडकने जैसा
मंदी के दौर में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम जले पर नमक छिडकने जैसा

Dilip Sharma | Publish: Sep, 20 2019 01:07:27 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

संशोधित मोटर वाहन अधिनियम में यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने के विरोध में गुरुवार को अंचल में भी ट्रकों के चक्के थमे रहे। हालांकि इससे करोड़ा रुपए का होजरी, चाय और इंजीनियरिंग उत्पाद का व्यवसाय प्रभावित हुआ।

कोयम्बत्तूर. संशोधित मोटर वाहन अधिनियम में यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने के विरोध में गुरुवार को अंचल में भी ट्रकों के चक्के थमे रहे। हालांकि इससे करोड़ा रुपए का होजरी, चाय और इंजीनियरिंग उत्पाद का व्यवसाय प्रभावित हुआ।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आह्वान पर १२ घंटे की हड़ताल में कोयम्बत्तूर , तिरुपुर, नीलगिरि व आसपास के जिलों के सभी ट्रक संचालकों ने भाग लिया। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने केन्द्र सरकार से तत्काल अधिनियम को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि मंदी के दौर में भारी जुर्माना लगाना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
कोयम्बत्तूर में हड़ताल के बारे में यहां के लॉरी एसोसिएशन के सूत्रों ने बताया कि हड़ताल के दौरान १० हजार ट्रकों ने किसी भी तरह के माल की ढुलाई नहीं की। जो ट्रक रास्ते में थे।वे वहीं पर १२ घंटे के लिए थम गए।माल रास्ते में ही अटक गया।
हड़ताल के कारण कोयम्बत्तूर में मोटर पम्प सेट , टूल्स सहित इंजीनियरिंग उत्पादों का करीब तीन करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ।
इधर हॉजरी सिटी तिरुपुर के ट्रक चालकों ने भी केन्द्र सरकार के अधिनियम का विरोध किया। यहां लगभग चार हजार ट्रकों का संचालन नहीं हो सका। सबसे ज्यादा यही पर कारोबार प्रभावित हुआ। तिरुपुर लॉरी एसोसिएशन के अनुसार यहां से २४ घंटों ट्रकों का संचालन होता है। हॉजरी निर्माता संघ के सूत्रों ने बताया कि बारह घंटे की इस हड़ताल के कारण १० करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है।
तिरुपुर में देश की पचास फीसदी होजरी उत्पाद तैयार होते हैं और देश के हर हिस्से में यहां से माल जाता है। यहां के हॉजरी उत्पादों का बड़े पैमाने पर विदेशों को निर्यात होता है। हड़ताल के कारण ट्रकों से माल बंदरगाह तक तय समय पर नहीं पहुंच पाया।
दूसरी ओर नीलगिरी जिले से दूसरे शहरों के लिए भेजी जाने वाली चाय पत्ती का लदान नहीं हो सका। करोड़ों का माल एक दिन के लिए फैक्ट्रियों में ही अटक गया।
हालांकि छोटे वाहनों से केरल व कर्नाटक के विभिन्न शहरों में सब्जी की आपूर्ति की गई, पर बढ़े हुए भाव का असर आम जनता को झेलना पड़ा।

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