मोबाइल से काट रहे वक्त

लॉकडाउन का गुरुवार को दूसरा दिन है और वक्त काटे से नहीं कट रहा। दिहाड़ी तो गईही समझो ,घर -परिवार से हजारों किलोमीटर दूर अटके पड़े हैं। यहां हम परेशान हैं तो वहां पत्नी और बच्चे।यह पीड़ा उन प्रवासियों की है जो अपने घर परिवार को छोड़ कर हजारों किलोमीटर दूर कोयम्बत्तूर में छोटे-मोटे काम करते हैं।

कोयम्बत्तूर. लॉकडाउन का गुरुवार को दूसरा दिन है और वक्त काटे से नहीं कट रहा। दिहाड़ी तो गईही समझो ,घर -परिवार से हजारों किलोमीटर दूर अटके पड़े हैं। यहां हम परेशान हैं तो वहां पत्नी और बच्चे।यह पीड़ा उन प्रवासियों की है जो अपने घर परिवार को छोड़ कर हजारों किलोमीटर दूर कोयम्बत्तूर में छोटे-मोटे काम करते हैं।
मन करता है उड़ कर घर पहुंच जाए
राजस्थान के पाली इलाके के नरोत्तम का कहना है कि कोरोना के डर के बीच मन तो कर रहा है कि उड़ कर अपने गांव पहुंच जाए पर मन मसोस कर यहीं पड़े हैं। अब सहारा सिर्फ नेट और मोबाइल का है। इसी के सहारे दिन काट रहे हैं।पर इससे भी कब तक खेले। कितना सोए।सब कुछ करने के बाद हाथ में लेना मोबाइल ही पड़ता है।
घर वालों से वीडियो कॉल पर बात से तसल्ली
पं. बंगाल के सौमित्र दत्ता का कहना है कि उनकी शादी तो नहीं हुईहै। घर पर भाई-बहन , माता पिता है। उनकी फिक्र है पर पिछली बार छोटे भाई ने जिद की तो फोर जी मोबाइल दिला कर आया था । अब उसकी अहमियत समझ में आ रही है। दिन में एक बार सभी से वीडियो कॉल पर बात हो जाती है।एक-दूसरे को आमने सामने पा कर तसल्ली हो जाती है।

Dilip Reporting
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