पश्चिमी घाट में क्यों संकट में है जंगली जीवों की जान

पश्चिमी घाट में क्यों संकट में है जंगली जीवों की जान

Kumar Jeevendra | Updated: 11 Jul 2019, 12:49:06 PM (IST) Coimbatore, Coimbatore, Tamil Nadu, India

नीलगिरि व पश्चिमी घाट के आंचल में आबाद कोयम्बत्तूर में एक बार फिर से वन्य जीवों के तस्कर व शिकारी सक्रिय हो गए हैं। Coimbatore नीलगिरि के जंगल में पाए जाने वाले हर जानवर का ( Tamil Nadu ) शिकार हो रहा है।

कोयम्बत्तूर. नीलगिरि Niligris व पश्चिमी घाट Western Ghats के आंचल में आबाद कोयम्बत्तूर में एक बार फिर से वन्य जीवों के तस्कर व शिकारी सक्रिय हो गए हैं। Coimbatore वन विभाग की गश्ती दलों की कार्रवाई से इसकी पुष्टि हो रही है। नीलगिरि के जंगल में पाए जाने वाले हर जानवर का शिकार हो रहा है। उनकी खाल से लेकर हर अंग का काला कारोबार कोयम्बत्तूर में होता है।लेकिन वन विभाग और पुलिस वन्य जीव तस्करों के किसी बड़े गिरोह को पकड़ नहीं पायी है। Coimbatore इसका बड़ा कारण गिरोह के आका केरल में सुरक्षित बैठ कर इस धंधे को अपने गुर्गों के जरिए अंजाम देते रहे हैं।पिछले सात दिनों में ही औसतन एक मामला वन्य जीवों की तस्करी और शिकार का सामना आया है। मंगलवार को ही बोलुवमपट्टी रेंज में वन विभाग के दस्ते ने जंगली का शिकार करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया। Coimbatore इन पर ४० हजार का जुर्माना लगाया गया है।इसी तरह मदुक्करै में सोमवार को दो लोगों को पकड़ा गया। ये कर्पगम कॉलेज के पास एक काली चील को बेचने की फिराक में थे। इसी तरह तीन दिन पहले अंगलाकुरुचि मनें दुम्बी की तस्करी करते पांच लोगों को पकडा था। और तो और पांच दिन पहले पंखों की खातिर पांच मोर जहरीले दाने डाल कर मार दिए गए। ( Tamil Nadu ) इसी सप्ताह खरगोश का शिकार करते हुए भी चार लोग पकड़े गए थे। ( Tamil Nadu ) मांस और खाल के लिए के लिए हरिणों का शिकार आए दिन होता है।
तस्करों की पहुंच घने जंगलों तक
सूत्रों ने बताया कि पिछले चार सालों में तस्करों से बाघ , तेंदुए व भालू की खाल , नाखून , दांत पेंगोलिन के शल्क, जीवित दुम्बी व स्टार क छुए , विभिन्न प्रजातियों के पक्षी व वन्य जीव तस्करों से बरामद किए जा चुके हैं। Coimbatore केरल में बैठे आकाओं के हाथ इतने लम्बे है कि वे वेस्टर्न घाट के जंगलों में पाए जाने वाले किसी भी जानवर जीवित या फिर उसकी खाल , अंग उपलब्ध करा सकते हैं। वन विभाग का मानना है कि शिकारी स्थानीय आदिवासी हो सकते हैं। Coimbatore इनकी सहायता के बिना जंगल में किसी का शिकार संभव नहीं है। उन्हें वन्यजीवों व उनके ठिकानों की जानकारी वन विभाग से ज्यादा रहती है। जैसा आर्डर मिलता है वे उसी वन्यजीव का शिकार कर तस्करों को सौंप देते हैं।
पक्षियों को नहीं छोड़ते
वन विभाग Forest Department की रिपोर्ट के अनुसार करूर में कुछ ऐसे लोग है जो छोटे तोते व अन्य पक्षियों को पकडऩे में माहिर हैं। ये इतने क्रूर है कि पक्षियों को पकडऩे के बाद उनके पंखों को नौंच देते है । ( Tamil Nadu ) जब तक नए पंख नहीं आते ये उड़ नहीं पाते।छोटे पक्षियों का शिकार करने वाले शाहीन, काली चील व अन्य शिकारी पक्षी भी ये मुंह मांगे दाम पर ( Tamil Nadu ) उपलब्ध कराते हैं।

जीवित मंूगा भी
भले ही कोयम्बत्तूर समुद्र तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर है पर यहां समंदर में पाए जाने वाले जीव भी चोरी छिपे बेचे जाते हैं। शहर में फिश एक्वेरियम की आड़ में यह धंधा भी होता है। Coimbatore यहां दुर्लभ प्रजाति के स्टार कछुए ही नहीं बल्कि जिन्दा मंूगा तक मिला है। ( Tamil Nadu )मंूगा भी यहां केरल के तस्कर ही उपलब्ध कराते हैं। ( Tamil Nadu )मंूगा काफी महंगा मिलता है।
चंदन पेड़ों पर भी नजर
यही हाल वनस्पति का है । चंदन सहित तमाम मंहगी लकडिय़ों वाले पेड़ों पर खूब कुल्हाडिय़ां चलती है। Coimbatore जंगल पर तो तस्करों का राज है ही। तस्करों ने शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों से भी चंदन के पेड़ चुराए।
पॉश कॉलोनी रेसकोर्स में ( Tamil Nadu ) जिला कलक्टर सहित पुलिस के आला अधिकारियों के आवास होने के बाद भी तस्करों ने चंदन के पेड़ काट लिए। यही नहीं पुलिस थाने व सरकारी कार्यालयों के परिसरों से भी पेड़ काट कर ले गए।

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