कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ की शिकायत करने से डरती हैं महिलाएं

कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के मामलों में महिलाएं पीडि़त होने के बाद भी शिकायत दर्जकराने में डरती है। कई मामलों में सिर्फ गुमनाम रिपोर्ट मिलती है। ऐसे में जांच आगे नहीं पाती।

By: Dilip

Published: 03 Jan 2020, 01:33 PM IST

कोयम्बत्तूर. कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के मामलों में महिलाएं पीडि़त होने के बाद भी शिकायत दर्जकराने में डरती है। कई मामलों में सिर्फ गुमनाम रिपोर्ट मिलती है। ऐसे में जांच आगे नहीं पाती।
राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए सितम्बर २०१८ में वन स्टॉप सेन्टर शुरू किया था। कोयम्बत्तूर जिले में दिसम्बर माह तक ३३१ शिकायतें दर्ज हुई थी। इनमें अधिकांश घरेलू प्रताडऩा के मामले थे, लेकिन कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के दो साल में सिर्फ पांच शिकायतें ही दर्ज हुई ।
यह तथ्य सामाजिक कल्याण विभाग की एक रिपोर्ट में सामने आए हैं। इस सम्बन्ध में विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वन स्टॉप सेन्टर के महिला हेल्पलाइन नम्बर १८१ पर शिकायत मिलती है। कई मामले अधिवक्ताओं के जरिए सामने आते हैं।
विशेष रूप से गांवों से घरेलू हिंसा की शिकायतें मिलती हैं। वन स्टॉप सेन्टर में पीडि़त और असहाय महिला को आश्रय मिलता है। पर फिलहाल यहां पांच दिनों के लिए ही पीडि़ता को रखा जा सकता है। एक साथ पांच महिलाएं रखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के मामलों में कई बार जांच आगे नहीं बढ़ पाती। इसका कारण ऐसे प्रकरणों में शिकायतें फोन से या पत्र से मिलती है। विभाग शिकायत की विस्तृत जानकारी चाहता है पर वे संकोच करते हैं। पूछने पर बताया जाता है कि मामला उजागर होने पर पीडि़ता की बदनामी होगी, जबकि विभाग उन्हें भरोसा दिलाता है कि पूरा मामला गोपनीय रखा जाएगा। इसके बाद भी पीडि़त महिला व उसके परिजन तैयार नहीं होते। इस तरह की शिकायत में महिलाएं अपने विभाग में काम करने वाले अधिकारी पर आरोप तो लगाती है पर अपना नाम नहीं बताती। बिना पूरे तथ्य के विभाग भला किसी अधिकारी के खिलाफ जांच कैसे कर सकता है। इस सम्बन्ध में एक महिला कर्मचारी ने बताया कि शिकायत के खतरे तो हैं ही। एक बार महिला की पहचान उजागर हो जाने के बाद उसे अपने कार्यस्थल पर सहयोगात्मक माहौल नहीं मिलता है। भले ही वह पीडि़त है, फिर भी कई सहयोगी उसके बारे में अपनी गलत राय बना लेते हैं। सरकारी नौकरी में जो महिलाएं हैं, उन्हें तो कोई दिक्कत नहीं पर जो महिलाएं निजी कम्पनियों में काम करती हैं। उन्हें शिकायत करने के बाद नौकरी खोने का डर बना रहता है। यहीं नहीं उन्हें दूसरी नौकरी मिलने में भी परेशानी होती है। महिलाएं परिवार को चलाने के लिए नौकरी करती है। अगर नौकरी चले जाएं तो दिक्कत तो होती है।

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