बीसीसीआइ सचिव अमिताभ चौधरी ने कहा कि भारत में ही पूरा आइपीएल मैच करवाने की है कोशिश

बीसीसीआइ सचिव अमिताभ चौधरी ने कहा कि भारत में ही पूरा आइपीएल मैच करवाने की है कोशिश

Mazkoor Alam | Updated: 20 Dec 2018, 09:51:01 PM (IST) क्रिकेट

दिसंबर की 18 तारीख को इसकी नीलामी भी पूरी हो चुकी है और हर फ्रेंचाइजी की अपनी पूरी टीम तैयार हो चुकी है।

नई दिल्ली : दुनियाभर में खेले जाने वाले क्रिकेट लीग में आइपीएल सबसे मशहूर लीग है। दुनियाभर के क्रिकेटर इस लीग में खेलना चाहते हैं तो प्रशंसकों की इच्‍छा इस मैच में बतौर दर्शक साक्षी बनने की। लेकिन इस बार 2019 आम चुनाव और आइपीएल की तारीख टकराने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में आइपीएल प्रशासकों को सुरक्षा व्‍यवस्‍था के मसले पर जूझना पड़ेगा। ऐसे में यह उम्‍मीद की जा रही है कि आइपीएल का पहला हाफ देश के बाहर जा सकता है और पसंदीदा जगहों में दुबई या दक्षिण अफ्रीका हो सकता है। लेकिन बीसीसीआइ के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने ऐसे संकेत दिए हैं कि पूरा आइपीएल देश में ही हो सकता है। उनके इस बयान से आइपीएल लवर्स को निश्चित खुशी मिलेगी। हर भारतीय प्रशंसक जो आइपीएल का मैच देखना चाहता है, उनकी मुराद पूरी होगी।

18 तारीख को हुई नीलामी
दिसंबर की 18 तारीख को इसकी नीलामी भी पूरी हो चुकी है और हर फ्रेंचाइजी की अपनी पूरी टीम तैयार हो चुकी है। लेकिन प्रशंसक इस बात से डरे हुए थे कि अगर आइपीएल देश के बाहर खेला गया तो उन्‍हें शायद यह मैच देखने का मौका न मिले। इस मुद्दे पर बीसीसीआइ के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने बड़ी खबर दी है कि बोर्ड आइपीएल 2019 के सभी मुकाबलों को भारत में कराने का तमाम प्रयास कर रहा है।

न आम चुनाव की और न ही लीग के तारीखों की हुई है घोषणा
बता दें कि अभी तक न तो 2019 के आम चुनाव की और न ही आइपीएल लीग के मैचों की तारीख की कोई घोषणा नहीं हुई है। आइपीएल के आयोजन स्‍थल की जानकारी भी नहीं दी गई है। शायद बीसीसीआइ 2019 में होने वाले आम चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार कर रहा है, ताकि उसके बाद ऐसी तिथि में आइपीएल कराया जाए, जिससे दोनों की तारीखों में टकराव की संभावना न रहे। लेकिन आइपीएल की तारीखों को लेकर बीसीसीआइ के पास सिर्फ यही संकट नहीं है। अगले साल 30 मई से 14 जुलाई तक आइसीसी एकदिवसीय क्रिकेट विश्व कप भी होने वाला है। इसलिए बीसीसीआइ को यह कोशिश करनी होगी कि 15 मई तक आइपीएल समाप्‍त हो जाए, ताकि विश्‍व कप की तैयारी करने के लिए प्‍लेयर्स को समय मिले। वह चोट और थकान की समस्‍या से उबर सकें। इस वजह से यह मुश्किल ही लग रहा है। बता दें कि 2009 में आम चुनाव की वजह से पूरा सत्र दक्षिण अफ्रीका में और 2014 में कुछ मुकाबले यूएई में आयोजित कराए गए थे।

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