BLOG: क्या दिल्ली डेयरडेविल्स की हार के लिए केवल गौतम गंभीर जिम्मेदार हैं?

गौतम गंभीर ने दिल्ली डेयरडेविल्स की कप्तानी छोड़ दी है। लेकिन अहम सवाल यह है कि दिल्ली के खराब प्रदर्शन के लिए क्या केवल गंभीर जिम्मेदार हैं?

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Published: 25 Apr 2018, 11:12 PM IST

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली डेयर डेविल्स के कप्तान गौतम गंभीर ने आज अपनी कप्तानी छोड़ दी हैं। अब उनके जगह पर श्रेयस अय्यर को टीम की कमान दी गई है। कप्तान बनाए जाने के बाद अय्यर का जो पहला बयान आया, उसमें वो कह रहे हैं कि उन्हें चुनौतियां पसंद है। मुझे टीम को शिखर पर ले जाने का मौका मिला है। मैं इसके लिए हरसंभव कोशिश करुंगा। कप्तानी छोड़ने के बाद गंभीर का जो बयान आया उसके अनुसार, यह उनका खुद का फैसला है। इस फैसले के लिए उनपर फ्रेंचाइजी की ओर से किसी तरह का दबाव नहीं था। गंभीर ने यह भी कहा कि मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं था और मैं दबाव नहीं झेल पा रहा था। यह (कप्तानी छोड़ने का) एक कारण है।

गौतम का यह आखिरी आईपीएल -

गंभीर के इस फैसले के बाद क्रिकेट प्रेमियों में कई तरह की बातें चल रही है। कई लोगों का मानना है कि गंभीर ने यह बड़ा ही साहसिक फैसला लिया। वहीं कई लोगों का यह भी मानना है कि यह गंभीर के करियर के समाप्त होने का संकेत हैं। यहां एक बात साफ कर दूं कि गंभीर ने पहले ही कहा था कि यह उनका आखिरी आईपीएल है। लिहाजा वो टीम को चैंपियन बनाना चाहते हैं। पुरानी बातों को पीछे छोड़ते हुए यदि इस फैसले की पड़ताल करें तो यह अहम सवाल खड़ा होता है कि क्या दिल्ली के बुरे प्रदर्शन के लिए केवल गंभीर जिम्मेदार है? इस सवाल के जवाब में हर किसी की अपनी राय होगी। लेकिन आंकड़े और पिछला रिकॉर्ड बहुत कुछ साफ करता है।

धमाकेदार अंदाज में की थी सीजन की शुरुआत -

गौतम गंभीर ने इस सीजन की शुरुआत जितने दमदार तरीके से की, वैसा बहुत कम बल्लेबाजों का रहा। गंभीर ने पहले ही मैच में पंजाब के खिलाफ शानदार अर्धशतकीय पारी खेली थी। इस मैच में दिल्ली के हार की सबसे बड़ी वजह लोकेश राहुल की वो पारी थी, जिसमें उन्होंने आईपीएल का सबसे तेज अर्धशतक लगाया था। राहुल की पारी के दम पर पंजाब अपने घरेलू मैदान पर बेशक बीस साबित हुई हो, लेकिन दिल्ली ने पंजाब की बराबरी का टक्कर दिया था।

जब बारिश बनी विलेन और दिल्ली को मिली हार -

दिल्ली का अगला मुकाबला राजस्थान रॉयल्स की टीम से जयपुर में हुआ। इस मैच में जब राजस्थान की बल्लेबाजी जारी थी, तभी बारिश होने लगी। जिसके चलते डकवर्थ लुईस नियम के तहत दिल्ली को 6 ओवर में 71 रन बनाने की चुनौती मिली। 6 ओवर यानि की 36 गेंदों में 71 रन, लगभग प्रति गेंद पर 2 रन। बारिश के बाद बल्लेबाजी के लिए मुश्किल हो चुके इस क्रीज पर दिल्ली के बल्लेबाजों ने हिम्मत तो दिखाई, लेकिन अंत में उन्हें निराशा हाथ लगी।

गौतम की कप्तानी में मिली एक मात्र जीत -

इसके बाद दिल्ली का अगला मुकाबला मुंबई इंडियंस से हुआ। मुंबई में हुए इस मैच में रोहित शर्मा की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट के नुकसान पर 194 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया। जिसके जवाब में दिल्ली ने सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय की धमाकेदार बल्लेबाजी के दम पर अंतिम गेंद में जीत हासिल की।

केकेआर ने बिगाड़ दी टीम की लय -

अबतक दिल्ली के खाते में एक जीत और दो हार मिल चुके थे। दिल्ली की टीम अपने चौथे मुकाबले में कोलकाता से भिड़ी। आंद्रे रसेल और नीतीश राणा की विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर इस मैच में केकेआर ने दिल्ली के सामने 201 रनों का लक्ष्य रखा था। इस मैच में दिल्ली की बल्लेबाजी बुरी तरीके से फ्लॉप रही। टीम के आठ बल्लेबाज दहाई के अंक में भी नहीं पहुंच सके। ईडेन गार्डन में खेले गए इस मैच में दिल्ली को 71 रनों की करारी शिकस्त नसीब हुई।

डिविलियर्स की आंधी में उड़े दिल्ली के दिलेर -

अपने अगले मुकाबले में दिल्ली का सामना रॉयल चैंलेजर बेंगलोर से हुआ। इस मैच में दिल्ली ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 174 रनों का सम्मानजनक खड़ा किया था। लेकिन बेंगलोर की ओर से एबी डिविलियर्स की तूफानी पारी के चलते दिल्ली को यहां भी हार नसीब हुई। इस मैच में डिविलियर्स ने मात्र 39 गेंदों पर 90 रनों की पारी खेली थी।

घर में मिली दिल पर लेने वाली हार -

पांच में से चार मुकाबले गंवा चुकी दिल्ली की टीम पहली बार अपने घर में किंग्स इलेवन पंजाब से मुकाबला करने फिरोज शाह कोटला मैदान में उतरी। अब तक फीकी दिख रही दिल्ली की गेंदबाजी इस मैच में पहली बार रंग में दिखी। दिल्ली ने पंजाब को महज 143 रनों पर रोक दिया। यहां से दिल्ली की जीत आसान दिख रही थी। लेकिन पंजाब के गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए इस मैच को चार रनों के अंतर से अपने नाम कर लिया।

अकेले चना कभी भाड़ नहीं फोड़ता -

ये तो रही दिल्ली के अबतक खेले गए मुकाबलों की बात। अब बात कप्तानी की। गंभीर आईपीएल के वो कप्तान है, जिन्होंने केकेआर को दो बार चैंपियन बनवाया है। बल्लेबाजी में उनके नाम पर आईपीएल में सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड दर्ज है। लेकिन क्या कोई कप्तान बिना टीम की सहायता के जंग जीत सकती है? ऐसा नहीं है कि दिल्ली की बल्लेबाजों या गेंदबाजों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया हो, लेकिन जीत के लिए जिस बुनियादी चीज की सबसे बड़ी जरुरत होती है, वो दिल्ली की टीम में अबतक नहीं दिखा। टीम का प्रदर्शन टुकड़ों में सामने आया है। ऐसे में गंभीर का क्या कोई भी टीम का कप्तान हो नतीजा वही होगा।

ताउम्र बना रहेगा गंभीर के लिए सम्मान-

व्यक्तिगत रूप से यदि गंभीर के फैसले की बात की जाए, तो साहब इतना तो पक्का है कि इस फैसले को लेने के लिए कितनी बड़ी हिम्मत की जरुरत है। गंभीर ने कप्तानी छोड़ने के बाद जिस तरह से अपनी सैलरी छोड़ने का भी निर्णय लिया, वो उनके प्रति सम्मान को और बढ़ा देती है। कोई भी क्रिकेटर अपने आखिरी टूर्नामेंट में इस तरह का फैसला लें, ऐसा विरले ही होता है। ये भी सच है कि हर एक स्पोर्ट्समैन के करियर की एक सीमा होती है। जहां पर आकर उसे इस तरह के फैसले लेने ही पड़ते है। अंत में यहीं कहना चाहुंगा कि न केवल क्रिकेटर बल्कि एक इंसान के रूप में भी गंभीर हमेशा से कप्तान रहे हैं और आगे भी रहेंगे।

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