एस श्रीसंत ने बचपन में ही कह दिया था, वह एक दिन टीम इंडिया के लिए खेलेंगे

एस श्रीसंत ने बचपन में ही कह दिया था, वह एक दिन टीम इंडिया के लिए खेलेंगे

Mazkoor Alam | Publish: Mar, 15 2019 02:22:18 PM (IST) क्रिकेट

  • कठोर परिश्रम करते थे श्रीसंत
  • सुबह से लेकर शाम तक लगे रहते थे
  • साथी उड़ाते थे मजाक

नई दिल्ली : साल 2013 में आइपीएल में स्पॉट फिक्सिंग में बीसीसीआइ का बैन झेल रहे एस श्रीसंत को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पॉट फिक्सिंग मामले से उन्हें आरोप मुक्त कर दिया है। अब बीसीसीआइ तीन महीने के भीतर यह फैसला लेगा कि क्रिकेट के मैदान पर वह वापसी कर सकते हैं या नहीं। यह तो ताजा घटनाक्रम है, लेकिन टीम इंडिया में पहली बार भी उन्हें जगह आसानी से नहीं मिली थी। इसके लिए उन्हें काफी संघर्घ था और काफी मेहनत करनी पड़ी थी। श्रीसंत ने इसकी जानकारी 2018 में बिग बॉस के दौरान श्रीसंत दी थी।

16 किमी चलकर जाते थे अभ्यास करने
अपनी बचपन की घटना के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया था कि जब वह स्कूल में थे, तभी से क्रिकेट के दीवाने थे और उसी वक्त से कड़ी मेहनत कर रहे थे। उस वक्त भी वह अपने साथियों से कहा करते थे कि वह एक दिन वह टीम इंडिया के लिए जरूर खेलेंगे। हालांकि उनकी इस बात का उनके साथी मजाक उड़ाया करते थे, लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। इसके बावजूद वह सुबह साढ़े 4 बजे तैयार होकर मैदान पर अभ्यास के लिए करने के लिए साइकिल पर घर से निकल जाते थे। घर से 16 किलोमीटर दूर मैदान था। रोज वह इतनी दूर साइकिल चला कर जाते और इसके बाद वहीं मैदान में ही कपड़े बदल कर स्कूल चले जाते। साढ़े तीन बजे स्‍कूल से छूटते वापस मैदान पर हाजिर हो जाते। पहले एक्सरसाइज करते उसके बाद क्रिकेट का अभ्यास। इसके बाद फिट रहने के लिए तैराकी करने रात में स्व‍िमिंग पूल जाते। फिर 16 किमी की साइकिल चलाकर घर पहुंचते। इसके बाद भी वह सोते नहीं थे। नियमित रूप से स्‍कूल में मिला होमवर्क पूरा करते। होमवर्क पूरा करने के बाद ही सोने के लिए बिस्तर पर जाते थे।

पैसों की भी किल्लत थी
श्रीसंत ने बताया कि फरवरी 2004 से सितंबर 2005 तक एक वक्त ऐसा था कि उनके पास कमरे का किराया देने के लिए भी पैसे नहीं थे। उस साल उनका केरल की रणजी टीम में चयन नहीं हुआ था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, तब मदद के लिए मुनफ आगे आए। उन्‍होंने न सिर्फ हौसला बढ़ाया, बल्कि आर्थिक मदद भी की।

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