बिहार क्रिकेट का 17 साल पुराना वनवास खत्म, रणजी खेलने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में बिहार क्रिकेट को रणजी समेत अन्य घरेलू टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है।

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Published: 04 Jan 2018, 05:41 PM IST

नई दिल्ली। बिहार के क्रिकेटरों का करीब 17 साल पुराना वनवास खत्म होता नजर आ रहा है। साल 2000 में झारखंड के गठन के बाद से जिस तरह से बिहार के क्रिकेटरों को अपना करियर बनाने के लिए किसी दूसरे राज्य का रूख करना पड़ता था, वो अब आने वाले समय में नहीं होगा। जी हां, सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद बिहार के क्रिकेटरों का बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के बैनर तले रणजी समेत अन्य घरेलू टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जारी अपने आदेश में कहा कि बिहार की टीम बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के तहत रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूर्नामेंटों में हिस्सा लेगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि क्रिकेट के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

झारखंड को मिली थी सदस्यता
बता दें कि बिहार अभी बीसीसीआई का पूर्णकालिक सदस्य नहीं है। जिस कारण साल 2000 के बाद से बिहार क्रिेकटे टीम किसी भी स्पर्धा में हिस्सा नहीं ले सकी थी। दरअसल जब बिहार-झारखंड का बंटवारा हुआ था, तब बिहार की सदस्यता झारखंड को मिल गई थी। जिसके बाद चली लंबी लड़ाई के बाद अब ये फैसला सामने आया है।

बीसीसीआई कब देगी सदस्यता?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पूर्व कैग चीफ विनोद राय की अध्यक्षता वाली प्रशासकों की समिति (सीओए) कब तक बिहार को पूर्णकालिक सदस्यता प्रदान करती है। हालांकि बता दें कि लोढा समिति की रिपोर्ट के एक राज्य एक बोर्ड की सिफारिश के तहत भी बिहार का दावा सही है।

आदित्य वर्मा जीत कर भी हारे
बिहार क्रिकेट के लिए पिछले लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने वाले आदित्य वर्मा इस फैसले से जीत कर भी हार गए। दरअसल बिहार में क्रिकेट की बहाली के लिए आदित्य ने सबसे अहम काम किया है। लेकिन कोर्ट ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के बैनर तले बिहार के क्रिेकेटरों को खेलने का फैसला सुनाया है। बता दें कि आदित्य बीसीए की प्रतिद्वंद्वी संगठन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (कैब) के अध्यक्ष हैं।

 

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