'त्वचा से त्वचा संपर्क' को यौन उत्पीड़न ना मानने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

- सुप्रीम कोर्ट ने बॉबे हाईकोर्ट के फैसले पर विवाद के होने के बाद लगाई रोक।
- बॉबे हाईकोर्ट ने त्वचा से त्वचा संपर्क' नहीं होने पर यौन उत्पीडऩ नहीं माना जाएगा।

- बॉबे हाईकोर्ट ने कहा था किसी नाबालिग को निर्वस्त्र किए बगैर उसके शरीर को छूना यौन उत्पीडऩ नहीं माना जा सकता।

By: विकास गुप्ता

Published: 28 Jan 2021, 12:15 PM IST

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि त्वचा से त्वचा संपर्क' नहीं होने पर यौन उत्पीडऩ नहीं माना जाएगा। शीर्ष अदालत ने मामले के आरोपी के बरी होने के आदेश पर भी रोक लगा दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को कई संगठनों व हस्तियों ने हास्यास्पद बता आलोचना की थी। यूथ बार एसोसिएशन में फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया है। दो हफ्ते में इसका जवाब मांगा गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ की न्यायाधीश पुष्पा गनेडीवाला ने एक मामले के फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग को निर्वस्त्र किए बगैर उसके शरीर को छूना यौन उत्पीडऩ नहीं माना जा सकता।

इस तरह का कृत्य पोक्सो अधिनियम के तहत यौन हमले के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता। ऐसे मामले के आरोपी के खिलाफ आइपीसी की धारा 354 (शील भंग) के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

पॉक्सो एक्ट के जुर्म से किया था बरी -
न्यायाधीश गनेडीवाला ने एक सत्र अदालत के उस फैसले में संशोधन किया था, जिसमें 12 साल की लड़की के यौन उत्पीडऩ के लिए 39 साल के सतीश को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। सत्र अदालत ने सजा पोक्सो कानून और धारा 354 के तहत सुनाई थी। हाई कोर्ट ने उसे पॉक्सो कानून के तहत अपराध से बरी कर दिया था। धारा 354 के तहत उसकी सजा बरकरार रखी गई।

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विकास गुप्ता
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