दिल्ली किडनी रैकेट का सरगना राजकुमार बंगाल से गिरफ्तार

दिल्ली किडनी रैकेट का सरगना राजकुमार बंगाल से गिरफ्तार

Rakesh Mishra | Publish: Jun, 08 2016 11:47:00 AM (IST) क्राइम

दिल्ली सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। समिति से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया

कोलकाता। दिल्ली अपोलो अस्पताल किडनी रैकेट कांड के संदिग्ध सरगना टी.  राजकुमार राव को दिल्ली पुलिस की टीम ने पश्चिम बंगाल के न्यूटाउन थाना इलाके के गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है। अब राव को अदालत में पेश किया जाएगा। पुुलिस ने कहा कि इस मामले में 10 डॉक्टरों से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस को अपोलो अस्पताल के एक वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ पर भी शक है। अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

दिल्ली सरकार ने जांच कमेटी का गठन किया
वहीं दिल्ली सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। समिति से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या अस्पताल की तरफ से कोई प्रक्रियागत चूक हुई। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ डीके तांपे की अध्यक्षता वाली जांच समिति से कहा गया है कि वह एक सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपे। वहीं दिल्ली पुलिस इंटरनल कमेटी के चार डॉक्टर के पैनल से भी पूछताछ करेगी। सभी को नोटिस जारी किया गया है।

विदेशों तक फैले हैं गिरोह के तार
इससे पहले दिल्ली पुलिस की टीम ने मामले में सिलीगुड़ी से एक महिला को गिरफ्तार किया था। उसने अपनी किडनी बेची है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से भी एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। कोलकाता से राव की गिरफ्तारी से महानगर स्थित अपोलो अस्पताल भी संदेह के घेरे में आ गया है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि जांच की जा रही है। किसी को नहीं बख्शा जाएगा। पुलिस ने बताया कि राव को नेपाल, श्रीलंका और इंडोनेशिया में इसी तरह के गिरोह से जुड़ा माना जा रहा है।

अपोलो अस्पताल को पुलिस ने भेजा नोटिस
पुलिस का दावा है कि राजकुमार नाम बदल-बदल कर अलग-अलग शहरों में रहता था। किडनी खरीदने बेचने का काम उसने चेन्नई के एक डॉक्टर के साथ मिलकर शुरू किया था, लेकिन डॉक्टर के बेनकाब होने के बाद वो दिल्ली से धंधा चलाने लगा। हर शहर में उसके अलग-अलग नाम होते थे। दिल्ली पुलिस को संदेह है कि अपोलो में किडनी रैकेट कई वर्षों से चल रहा था। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अपोलो अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर पिछले कई वर्षों में की गई किडनी ट्रांसप्लांट का रिकार्ड मांगा है। नोटिस में कहा है कि किडनी ट्रांसप्लांट की सारी फाइलें और कागजात को सुरक्षित रखा जाए और जल्द से जल्द दिल्ली पुलिस को दिए जाए।

तीन डोनर्स भी चढ़े पुलिस के हत्थे
इससे पहले एसआईटी ने मंगलवार को इस मामले में उमेश श्रीवास्तव, नीलू श्रीवास्तव और मोमिता को गिरफ्तार किया था। कानपुर के रहने वाले उमेश और नीलू पति पत्नी है, वहीं मोमिता पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। तीनों ने इसी साल जनवी में चार-चार लाख में अपनी किडनी बेची थी। तीनों को आरोपी सत्यप्रकाश उर्फ आशु दिल्ली से लेकर आया था। दलालों ने उमेश की किडनी के एवज में 24 लाख, नीलू की किडनी के एवज में 32 लाख और मोमिता की किडनी की एवज में 25 लाख लिए थे। उल्लेखनीय है कि 2 जून को दिल्ली पुलिस ने राजधानी के इंद्रप्रस्थ स्थित अपोलो अस्पताल में किडनी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए अस्पताल के दो कर्मचारी समेत तीन जने को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह के तार पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, चेन्नई और तमिलनाडु से जुड़े हैं। दिल्ली पुलिस इन सभी जगहों पर छापामारी कर रही है।
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