JNU Violence पर जल्द सुुनवाई की मांग, दिल्ली की अदालत ने खारिज की याचिका

  • बीते 5 जनवरी को JNU Campus में हुई थी हिंसा।
  • Court ने कहा- पहले से दर्ज FIR पर जांच जारी।
  • JNU Professor सुचित्रा सेन ने दायर की थी याचिका।

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ( Delhi Court ) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ( JNU ) के एक प्रोफेसर की याचिका ( Plea ) को खारिज कर दिया है। इस याचिका में बीते 5 जनवरी को विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और शिक्षकों पर हुए हमले के मामले में एफआईआर ( FIR ) दर्ज करने की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।

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ड्यूटी मजिस्ट्रेट वसुंधरा छौंकर ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस बात पर फिर से ध्यान देने की जरूरत है कि भीड़ की हिंसा के बारे में पहले से ही दर्ज प्राथमिकी की जांच जारी है। इसके साथ ही दिल्ली उच्च न्यायालय ( Delhi High Court ) ने जांच एजेंसी को इस मामले में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

मंगलवार को अदालत ने कहा कि कोर्ट ने तर्कों पर न तो कोई टिप्पणी करने से परहेज किया और न ही यह अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) के तहत एक आवेदन के अंतिम निपटान को प्रभावित कर सकती है।

hearings at rajasthan highcourt will be done through video conference

अदालत जेएनयू में प्रोफेसर सुचित्रा सेन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें भीड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए जनवरी में दायर याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता को हिंसा के दौरान गंभीर चोटें भी आई थीं।

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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने हाल ही में जेएनयू हिंसा पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि मामले की जांच जारी है और हमलावरों की पहचान करने और समयबद्ध तरीके से जांच का निष्कर्ष निकालने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, "आवेदक सुचित्रा सेन भी 5 जनवरी, 2020 को साबरमती टी-पॉइंट पर हुई घटना में घायल हो गईं थी और उन्होंने 6 फरवरी 2020 को वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस स्टेशन में एक अलग शिकायत दर्ज की थी। इस शिकायत को क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया गया है।"

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"जांच के दौरान सेन का बयान 20 फरवरी, 2020 को दर्ज किया गया था, जिसमें उन्होंने अपनी शिकायत में दिए बयान को दोहराया है। उनके बयान 161 सीआरपीसी के तहत भी दर्ज किए गए हैं। सुचित्रा सेन का एमएलसी (मेडिकल टेस्ट) एम्स से हासिल किया गया था।"

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि JNU परिसर में 3, 4 और 5 जनवरी से संबंधित सभी घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।

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अधिवक्ता अदित पुजारी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि अदालत ने 16 जनवरी को पुलिस को 23 मार्च तक एक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दाखिल करने के लिए कहा था, लेकिन कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन लागू होने से इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी।

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अमित कुमार बाजपेयी
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