रेप केस: नाबालिगों को बालिग मानने का प्रस्ताव खारिज

संस्दीय पैनल ने खारिज किया सरकार का प्रस्ताव, कानून में नहीं किया जाएगा कोई बदलाव

By: सुभेश शर्मा

Published: 25 Feb 2015, 03:03 PM IST

नई दिल्ली। संस्दीय पैनल ने सरकार के एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकार ने नाबालिगों को रेप और हत्या जैसे मामलों में बालिग मानने को प्रस्ताव दिया था। वहीं सरकार कानून में बदलाव लाने के लिए ऎसा करना चाहती है।

क्या है प्रस्तवा में

हालांकि सरकार के प्रस्ताव में कहा गया है कि आरोपी को दोषी पाए जाने पर भी उसे उम्र कैद या मौत की सजा नहीं सुनाई जाएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनक गांधी ने हाल ही में कहा था कि वे प्रस्ताव के पक्ष में हैं, जिसमें नाबालिगों को रेप और हत्या जैसे मामलों में बालिग के रूप में सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "पुलिस के डेटा के मुताबिक 50 फीसद सेक्स क्राइम 16 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों द्वारा किए गए है, जिन्हें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के बारे में पता होता है।"

कैसे मिली थी संशोधन को मंजूरी

इससे पहले निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले के बाद लोगो की मांग पर केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी गई थी। गौरतलब है कि निर्भया मामले में बालिग आरोपियों को सजा हुई, लेकिन नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने का फैसला दिया गया था। इसके बाद कानून में संशोधन की मांग करते हुए किशोर की आयु सीमा 18 से घटाकर 16 वर्ष करने की मांग की गई।
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सुभेश शर्मा
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