दिल्‍ली : ह्युमन ट्रैफिकिंग का एक और मामला सामने आया, आदिवासी सुम्‍मी ने भागने के बाद सुनाया दर्द

दिल्‍ली : ह्युमन ट्रैफिकिंग का एक और मामला सामने आया, आदिवासी सुम्‍मी ने भागने के बाद सुनाया दर्द

Mazkoor Alam | Publish: Sep, 16 2018 10:32:08 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 10:32:09 PM (IST) क्राइम

दलालों ने झारखंड के बेड़ो गांव की एक आदिवासी महिला सुम्मी उराइन को दिल्ली में काम दिलाने का झांसा देकर 55 हजार रुपए में बेच दिया।

नई दिल्‍ली : पश्चिम बंगाल से काम दिलाने के नाम दो लड़कियों को दिल्‍ली लाकर जीबी रोड पर बेच देने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि इस शर्मनाक कड़ी में एक और घटना जुड़ गई है। इस बार दलालों ने झारखंड के बेड़ो गांव की एक आदिवासी महिला सुम्मी उराइन को दिल्ली में काम दिलाने का झांसा देकर 55 हजार रुपए में बेच दिया। जैसे पिछली दोनों महिलाएं जीबी रोड से किसी तरह भाग कर महिला आयोग की मदद लेने में कामयाब रही थीं, ठीक उसी तरह सुम्‍मी भी भाग निकली और रांची पहुंच गई और वहां मानव तस्‍करी के आरोप में एफआइआर दर्ज कराया है। उसने झारखंड के ही दो लोगों खटंगा के बिरसा उरांव और सिसई के विनोद लोहरा पर बेचने का आरोप लगाया है।

एजेंसी की मालकिन ने घर जाने की नहीं दी इजाजत
सुम्‍मी ने बताया कि जहां उसे काम पर लगाया गया था, जब उससे उसने कुछ दिनों के लिए घर जाने की इजाजत मांगी। उससे कहा कि उसके छोटे-छोटे दो बच्‍चे हैं। वह उनसे मिलना चाहती है तो मालकिन ने बताया कि उसने विनोद नाम के आदमी से उसे 55 हजार रुपए देकर खरीदा है। इसके अलावा उसके घर के लिए भी आठ हजार रुपए दिए हैं। इसलिए वह उसे छुट्टी नहीं देगी। अब वह कभी वापस नहीं जा सकती।

काम के पैसे भी कभी नहीं दिए
इतना ही नहीं सुम्मी को काम के दौरान एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई। इसके अलावा जब वह भाग कर अपने घर पहुंची तो उसे पता चला कि उसके घर भी विनोद ने एक पैसा नहीं दिया है। सुम्‍मी ने यह भी बताया कि उसने प्‍लेसमेंट एजेंसी की मालकिन सुनीता से कई बार रहम की भीख मांगी। उससे कहा कि वह उसे जाने दे। लेकिन प्‍लेसमेंट एजेंसी मालकिन ने उस पर जरा भी तरस नहीं खाया। ऐसे में उसके पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं था कि वह वहां से भाग निकले। एक दिन मौका देखकर वह वहां से भाग निकली और किसी तरह ट्रेन पकड़ कर घर पहुंची और अपने बच्‍चों से मिली। इसके बाद रांची में एफआइआर दर्ज कराया।

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