गंभीर हादसे के इंतजार में जिम्मेदार अधिकारी, पुल-पुलियाओं की हालत हो रही खस्ता

पार्वती नदी पर बने पुल को ठीक कराने के लिए क्षेत्र के लोगों ने कई बार अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से शिकायत की लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है। ऐसे में तो यही लगता है कि अधिकारी यहां दुर्घटना होने का इंतजार कर रहे हैं। जब यहां गंभीर हादसा होगा तब ही इसे ठीक कराया जाएगा।

By: rishi jaiswal

Published: 19 Jun 2020, 11:35 PM IST

डबरा/भितरवार. बारिश का सीजन शुरू होने वाला है पर अंचल के नदी व रपटे के पुल-पुलियाओं को सुधारने काम नहीं कराया गया है। स्स्थिति यह है की पुल-पुलियाएं जर्जर हालत में हैं और रेलिंग टूटी पड़ी है। इसके चलते बारिश के दौरान हादसों की आशंका बनी रहेगी।

भितरवार-करैरा मार्ग पर स्थित पार्वती नदी पर बने ब्रिज की रेंलिंग पिछले लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी है। जिम्मेदारों को इसे ठीक कराने की सुध नहीं है जबकि इस ब्रिज से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन निकलते हैं। पार्वती नदी पर बने पुल को ठीक कराने के लिए क्षेत्र के लोगों ने कई बार अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक रूप से शिकायत की लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

ऐसे में तो यही लगता है कि अधिकारी यहां दुर्घटना होने का इंतजार कर रहे हैं। जब यहां गंभीर हादसा होगा तब ही इसे ठीक कराया जाएगा। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि इसे ठीक करा दिया जाए तो बारिश के सीजन में कोई बड़ा हादसा नहीं होगा।

इसी प्रकार देवरा और भानगढ़ के बीच सूखा नदी पर बने रपटा भी जर्जर हालत में पहुंच गये है। 30 साल पहले बनाए गए रपट पर आड़ के लिए बना गई मुड्डियां भी कई जगह से गायब हो गई हैं। वाहनों को इस रपट से संभलकर निकलना पड़ता है। भितरवार से ग्वालियर जाने के लिए यह शार्टकट का रास्ता होने से इस पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। जब से इस रपट को बनाया गया है उसके बाद से आज तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। इस वजह से इसकी स्थिति जर्जर हुई। रपट जहां कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गया है वहीं इस पर बनी सड़क भी अपना मूल स्वरूप खो चुकी है।

रपट पर दोनों तरफ से वाहनों को सुरक्षित करने के लिहाज से पक्की मुड्डियां बनाई गई थी। लगातार वाहनों के निकलने से ये भी टूटकर ध्वस्त हो गई है। इसके कारण भारी वाहनों के निकलने पर नदी में गिरने का डर बना हुआ है। रात में तो खतरा और भी बढ़ जाता है। क्योंकि रपट पर अंधेरा होने से दो वाहन यदि आमने-सामने आ जाए तो हादसा हो सकता है।

भितरवार से ग्वालियर जाने के लिए यह रास्ता सुगम और शार्टकट है। इससे होकर जाने पर 20 किलोमीटर का फेर बच जाता है। वाहन चालक ग्वालियर जाने के लिए डबरा न जाते हुए इस रास्ते से देवरा, भानगढ़, होकर छीमक के रास्ते मकोड़ा होते हुए ग्वालियर पहुंच जाते हैं। इसके अलावा रेत से भरे हुए वाहन भी इसी मार्ग पर रपटे से होकर निकलते हैं जिससे भी रपटे की हालत खराब हो गई है।

पिछोर जंगीपुर मार्ग से सहोना होते हुए गोहिंदा जाते हैं। इसके बीच में छछूंद नदी पड़ती है इस पर रपटा आज तक नहीं बना है। लोग नदी पार कर निकलते हैं जिससे यहां कई हादसे हो चुके है। यदि वे जंगीपुर होकर जाते हैं तो उन्हें 10 किमी की दूरी तय करना पड़ती है इसलिए ग्रामीण नदी पार कर सहोना होते हुए गोहिंद, पुट्टी व सकतपुर जाते हैं। इस संबंध में कई बार क्षेत्रवासियों की रपट बनाए जाने की मांग भी उठ चुकी है।

'पुलों की रेलिंग टूटने का मामला संज्ञान में है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा गया है।' - कुलदीप दुबे, तहसीलदार

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