2 प्रतिशत तेवड़ा की छूट, 40 प्रतिशत तक भर रहे तेवड़ा

पुराना घुना चना भरने की कवायद शुरू

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 14 Jun 2020, 06:06 AM IST

दमोह. दमोह जिले में चना की खरीदी पहले दो दाने तेवड़ा निकलने पर भी नहीं खरीदी गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2 प्रतिशत तेवड़ा की छूट दिलवाई तो इसकी आड़ में जिले के 39 समिति प्रबंधकों की बांछे खुल गईं। इधर किसानों की आड़ में अपना अमानक चना खफाने बैठे व्यापारियों की मानों मुरादें पूरी हो गई हों, अब लेन-देन कर 40 से 50 प्रतिशत तेवड़ा मिक्स चना, घुना चना और तीन साल पुराना चना खरीदकर गोदामों में पहुंचाया जा रहा है।
पत्रिका एग्रो क्लब से जुड़े किसान शिकारपुरा, पिपरिया केंद्र की खरीदी जो इटवा खुर्द हायर सेकंडरी स्कूल में चल रही है। वह बताते हैं कि यहां पर खरीदी की गई। जिसमें 10 से 40 प्रतिशत तेवड़ा मिक्स चना भरवाने के एवज में प्रति क्विंटल से 100 से 500 रुपए का खर्च लग रहा है। यह सीधे तौर पर सर्वेयर व समिति प्रबंधक के बीच बंट रहा है। इसके अलावा घुना, तीन साल पुराना कीड़े लगे चना को 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से गोदाम के अंदर कराया जा रहा है। यहां से कई किसान अपना चना बेच चुके हैं, वह चना बेचने के बाद यह बात कह रहे हैं कि यदि समिति प्रबंधक व सर्वेयर को रुपए नहीं देते तो उनका चना नहीं तुल पाता।
व्यापारियों का ही अमानक चना तुल रहा
जिले में 27 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया था, लेकिन उन्होंने खरीदी केंद्रों पर रुचि नहीं दिखाई है, उन्होंने रुपयों की जरूरत होने पर किसान को कम कीमत पर ही अपना चना बेच दिया है। इन व्यापारियों ने किसानों से चना के साथ उनके पंजीयन भी खरीद लिए हैं, किसान ने 200 से 300 रुपए के लालच में अपने चना के साथ पंजीयन भी बेच दिया है। अब व्यापारी किसान के खरीदे चना में अपना पुराना, अमानक चना आधा मिक्स कर रहा है। जिससे इस समय जितनी भी खरीदी हो रही है, उसमें भले ही किसान सामने नजर आ रहे हों, लेकिन दरअसल यह सभी बोरियां व्यापारियों की गोदाम से आ रही हैं, किसान केवल मॉडल स्वरूप कुछ रुपयों के लालच में सामने खड़ा नजर आ रहा है।
किसानों की मजबूरी का उठा रहे फायदा
हर साल देखा जाता है कि चना खरीदी में पहले किसानों को मजबूर किया जाता है, किसान हर तरफ से टूटा रहता है, जिससे वह अपनी उपज जल्दी बेचकर रुपया चाहता है। उसकी इन जरुरतों और मजबूरी का फायदा व्यापारी व अप्रत्यक्ष रूप से सरकार उठाती है, पहले तेवड़ायुक्त चना न लेने का फरमान फिर आखिरी दिनों में 2 प्रतिशत तेवड़ा की छूट देकर भ्रष्ट सर्वेयरों व समिति प्रबंधकों के माध्यम से सीधे तौर पर व्यापारियों का लाभ कराकर किसानों का शोषण खरीदी के माध्यम से किया जा रहा है।
परिवहन की मंथर गति
हटा में पिछले दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है। मानसून की आमद हो गई। इधर हटा मंडी में चना खरीदी समर्थन केंद्र शेड पर खरीदे गए चना का परिवहन नहीं किया जा रहा है। परिवहन न किए जाने से जगह की कमी का बहाना बनाकर किसानों की उपज न रखने का बहाना बनाया जा रहा है। वहीं इस खरीदी केंद्र पर व्यापारियों का चना सीधे सरकारी बोरियों में तुलवाकर परिवहन कराया जा रहा है। पिछले साल अमानक चना खरीदने पर कार्रवाई हुई थी और यहां का दो ट्रक चना कटनी से वापस आया था, इसके बाद भी यहां सुधार न होकर गड़बड़ी की जा रही है।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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