72 दिन बाद अब शिशुगृह में रहेगी नवजात, नहीं मिली जिला अस्पताल में जन्म देकर भागी मां

बाल कल्याण समिति के आदेश पर किया नवजात बेटी को मातृछाया की अधीक्षिका के हवाले

दमोह. दस सितंबर को प्रसव के बाद एक प्रसूता बच्चे को एसएनसीयू में नवजात बेटी को छोड़कर भाग गई थी। जिसके बाद से जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड मे उसका इलाज चल रहा था। इस बीच जिला बालकल्याण विभाग ने गुरुवार को आगे की कार्रवाई करते हुए नवजात बेटी को सागर स्थित मातृ छाया की अधीक्षिका के सुपुर्द किया। गुरुवार को विधि सलाहकार, परिवीक्षा अधिकारी किशोर न्याय बोर्ड मनीष खरे जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड पहुंचे। जहां पर उनके साथ सागर से आईं मातृ छाया शिशुगृह की अधीक्षिका संगीता मिश्रा भी थीं। जिन्होंने सिविल सर्जन डॉ ममता तिमोरी, ड्यूटी पर तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शेंन्की अग्रवाल तथा एसएनसीयू प्रभारी मोना सिस्टर की मौजूदगी रही। जिनकी मौजूदगी में नवजात बेटी को अधीक्षिका सागर के हवाले किया गया। मामले में पत्रिका ने १२ अक्टूबर के अंक में 'नवजात बेटी को अस्पताल में ही छोड़ गई मां, फर्जी नाम पता कराया था दर्जÓ शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया था। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई थी। लेकिन अभी तक उस नवजात की मां की तलाश पुलिस नहीं कर सकी है। क्योंकि जिसका प्रसव हुआ था उसने एसएनसीयू में अलग तथा मैटरनिटी वार्ड में अलग नाम दर्ज कराने के बाद बच्ची को एसएनसीयू वार्ड में छोड़कर लापता हो गई थी। पुलिस ने अपने स्तर से महिला को तलाशने की बात कही थी, लेकिन आज तक कोई कामयाबी नहीं मिल सकी।
मामले में ड्यूटी के दौरान उपस्थित डॉ. सेंकी अग्रवाल ने बताया कि १० सितंबर को किसी ललिता नामक महिला के प्रसव के बाद नवजात बेबी को भर्ती कराया गया था। तभी से उसकी देखरेख एसएनसीयू वार्ड में स्टॉफ द्वारा की जा रही थी। जिसकी आगे की प्रक्रिया के लिए उसे मातृ छाया सागर भेजने की कार्रवाई सिविल सर्जन डॉ. ममता तिमोरी की उपस्थिति में की गई है।
परिवीक्षा अधिकारी मनीष खरे ने बताया कि १० सितंबर को मिली नवजात को मातृछाया सागर भेजने की कार्रवाई बालकल्याण विभाग के आदेश पर प्रशस्तिकरण की कार्रवाई कराई गई है। समाचार पत्रों में संबंधित नाबालिग को लेकर उत्तराधिकारी के लिए अगर कोई है तो उसको लेकर विज्ञापन जारी किया गया है। इसके बाद अगली कार्रवाई गोदनामा को लेकर की जाएगी। जो भी व्यक्ति नवजात को गोद लेना चाहेंगे उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया को पूरा करना पड़ेगा। फिर चयन होने पर योग्य व्यक्ति को गोदनामा की कार्रवाई के बाद दी जाएगी।
मन नहीं लगेगा -
मोना सिस्टर का कहना है कि उनका पूरा स्टॉफ नवजात की देखरेख करता था। सभी लोग उसकी देखरेख करने के साथ उसका पूरा खर्च भी उठा रहे थे। वह परिवार की एक सदस्य जैसी थी। लेकिन गुरुवार को बेटी अब सागर जा रही है। जिससे उन्हें बहुत बुरा लगेगा।

lamikant tiwari
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