15 अगस्त 1947 को आजादी की खुशी में रोपा गया पौधा हुआ 72 वर्ष का

15 अगस्त 1947 को आजादी की खुशी में रोपा गया पौधा हुआ 72 वर्ष का

Samved Jain | Publish: Aug, 16 2019 02:27:59 PM (IST) Damoh, Damoh, Madhya Pradesh, India

72 वर्ष पूर्व रोपा पौधा दिलाता है आजादी के जश्न की याद

दमोह. भारत देश की आजादी की खुशी में रोपा गया एक पौधा 15 अगस्त 2019 को 72 वर्ष का हो गया है। 72 साल पहले रोपा गया एक नन्हा पौधा अब विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। लोग इस वृक्ष में भारत को देखते है। साथ ही आजादी को याद करते है। बताया जाता है कि यह पौधा 15 अगस्त 1947 को रोपा गया था। जो आजादी के 73वें वर्ष के साथ 73 में प्रवेश कर गया है।

 

दमोह जिले के घटेरा अंचल में लगे इस वृक्ष को देखने काफी लोग पहुंचते है। देश को आजाद हुए भले ही 73 वर्ष का लंबा समय गुजर चुका हो, और देश को आजाद कराने के लिए न जाने कितने देश के सच्चे सपूतों से अपनी कुर्बानी दी और अमर होकर हमें आजादी दिलाई हो और भारत को अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 बह दिन जब हमें आजादी मिली। जिस दिन देश आजाद हुआ, उसी दिन विधान सभा क्षेत्र जबेरा के रेल्वे स्टेशन घटेरा मे देश को मिली आजादी का जश्न मनाने के लिए एक पीपल का पौधा रोपा गया जो आज एक विशालकाय पेड़ बन गया है।

आजादी के दिन घटेरा में रेलवे कर्मचारियों ने लगाया था पीपल का पौधा


कटनी-दमोह रेल सेक्शन के रेल्वे स्टेशन घटेरा के कार्यालय और ब्यारमा नदी पर बने रेल्वे पुल के बीच रेल्वे फाटक के ठीक सामने चंडी माता मंदिर के समीप ही ठीक आज ही के दिन 15 अगस्त 1947 को जब भारत देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली और देश स्वतंत्र हुआ था। उसी दिन घटेरा मे पदस्थ रेल्वे विभाग के कर्मचारी वर्ग व ग्रामीणों ने मिलकर एक अनोखे अंदाज मे आजादी का जश्न मनाया था। एक पीपल का पौधा लगाया था और लकड़ी के सहारे तिरंगे झंडे को फहरा कर सलामी दी गई थी।

 

घटेरा में था अंग्रेजों का गढ़, स्वतंत्रता के बाद शान से फहराया गया था तिरंगा


1932 मे जन्में ग्रामीण व रिटायर्ड रेल्वे कर्मचारी सुल्तान सिंह ने बताया कि घटेरा में भी अंग्रेज रहा करते थे और 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली तो संैकड़ो रेल्वे कर्मचारियों व ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस पीपल के पेड़ को रोपकर तिरंगा झंडा फहराया था, लेकिन बड़ी ही विडम्बना की बात है कि आज इस पेड़ को लोग भूल गए है। ग्राम के बुजुर्ग सरतार सेन, गजराज सिंह, अमर सिंह ने बताया कि आज भी उस दिन को याद कर आंख से आंसू झलक जाते हैं, जब पहली बार गांव में देश की आनबान शान कहे जाने वाला तिरंगा फहराया गया था।

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