आरटीओ जा रहा था बसों का काफिला, बीच में प्रशासन ने रोका

बस ऑपरेटर परिवहन कार्यालय में खड़ी करना चाह रहे थे बसें

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 26 Jun 2020, 06:06 AM IST

दमोह. दमोह जिला बस ऑपरेटर्स यूनियन ने दो दिन पहले बैठक कर निर्णय लिया था कि 25 जून को वह अपनी बसें व परिवहन कार्यालय में जमा कर देंगे। उनका सीधा आशय था कि वह बसें परिवहन कार्यालय में जमा कर रहे हैं, अब वही टैक्स भरे और वहीं संचालन कराए। एक तरह से यूनियन का यह गांधीगिरी वाला आंदोलन था, जिसकी भनक प्रशासन को लग गई। जैसे ही बस स्टैंड से बसों का काफिला निकला तो प्रशासन ने किल्लाई नाका पर बसों के काफिला को रोक लिया। यहां मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
यहां पर एसडीएम रविंद्र चौकसे, तहसीलदार बबीता चौबे सहित पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। बस के साथ चल रहे यूनियन के अध्यक्ष शंकर लाल राय, उपाध्यक्ष करन सिंह परिहार व संजीव कुमार राय, सचिव शमीम कुरैशी, कोषाध्यक्ष नवीन जैन सहित अन्य बस ऑपरेटरों से प्रशासन ने मौका स्थल पर ही चर्चा की। प्रशासन की ओर से एसडीएम व एएसपी ने गंभीरता से बात सुनी और ज्ञापन लेकर शीघ्र निर्णय का आश्वास दिया। जिस पर बसों का काफिला पुन: बस स्टैंड आ गया।
यूनियन अध्यक्ष शंकर लाल राय ने बताया कि उनकी पांच सूत्रीय मांग है कि जिसके संबंध में शासन और प्रशासन परिचित है। 22 मार्च से बसों का संचालन बंद होने से बस ऑपरेटर आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं। चालक, परिचालक, हेल्पर मिस्त्री वर्ग भी अपनी रोजी-रोटी के लिए जूझ रहा है। उनकी मांग है कि लॉकडाउन अवधि मार्च से जून तक का टैक्स शून्य किया जाए। लॉक डाउन में बंद रहीं यात्री बसों की बीमा पालिसी में तीन माह की अवधि बढ़ाने के लिए बीमा कंपनियों को निर्देश जारी किए जाएं।
सचिव शमीम कुरैशी ने कहा कि कोरोना के कारण जहां एक ओर सरकार विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से जनता को घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रही हे। वहीं अति आवश्यक होने पर ही घर से बाहर यात्रा करने कहा जा रहा है। ऐसे में सड़क मार्गों पर यात्रियों की संख्या में 70 से 80 प्रतिशत की कमी रहेगी। जिसके कारण एक ही मार्ग पर जरुरत से ज्यादा बसें संचालित करने पर बस मालिक को घाटे का सौदा होगा। अत: वाहन के नान यूज रखने का समय जो पूर्व में दो माह निर्धारित है, सरकार उसमें मोटर मालिकों को छूट प्रदान करे।
कोषाध्यक्ष नवीन जैन ने कहा कि मप्र शासन द्वारा 2018 में किराया निर्धारण किया गया था। उस समय डीजल का मूल्य 58 रुपए प्रति लीटर था। वर्तमान में डीजल का मूल्य 80 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इस प्रकार 22 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि डीजल के मूल्य में हो चुकी है। जिसके कारण पुराने किराए में वाहनों का संचालन करना संभव नहीं है। अत: शासन 15 रुपए प्रति लीटर की सबसिडी प्रदान करे या 50 प्रतिशत किराए में वृद्धि की जाए।
उपाध्यक्ष संजीव राय ने कहा कि लॉकडाउन में बसों का संचालन न होने के कारण चालक परिचालक व हेल्पर आर्थिक तंगी से परेशान हैं। उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सरकार 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करे। प्रशासन की ओर से एसडीएम रविंद्र चौकसे ने बस ऑपरेटरों को भरोसा दिलाया है कि उनके द्वारा मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित किया गया ज्ञापन पहुंचा दिया जाएगा।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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