आचार्यश्री के आहारचर्या के लिए सजती हैं चौकियां, जानें किन चीजों को देख छोड़ देते हैं खाना

आचार्यश्री के आहारचर्या के लिए सजती हैं चौकियां, जानें किन चीजों को देख छोड़ देते हैं खाना

awkash garg | Publish: Jun, 05 2016 09:04:00 AM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

आचार्यश्री विद्यासागर आहारचर्या के लिए सुबह नौ बजे के बाद निकलते हैं। अपने मुनि संग के साथ विद्यासागरजी सुबह साधना करते हैं और इसी बीच साधना के दौरान आहारचर्या के लिए उनके मन में आई विधि को लेकर वे श्रावकों के पास जाते हैं।

दमोह.कुंडलपुर के मान स्तंभ में हर दिन चौकियां सजती हैं। चौकियों में आचार्यश्री के लिए उनकी विधि का आहार तैयार होता है और उनके आगमन पथ पर खड़े लोग आचार्यश्री की कृपा का इंतजार करते हैं। बड़े बाबा की नगरी कुंडलपुर में कुछ ऐसा नजारा हर दिन होता है। स्वच्छ परिधान, श्रीफल या मंगल कलश लेकर आचार्यश्री की प्रतीक्षा करते सैकड़ों अनुयायी उनकी प्रतीक्षा करते हैं। आचार्यश्री की आहारचर्या किसी कठिन तप से कम नहीं है।

जटिल नियमों के साथ भक्त हर दिन वृहद स्तर पर तैयारियां करते हैं। आचार्यश्री के आहारचर्या के कठिन नियमों के कारण उनका इंतजार करने वाले श्रावक बेहद गंभीरता के साथ इन नियमों का पालन करते हैं। आइए जानते हैं आहारचर्या के जटिल नियम, जिसमें एक भी गलती आचार्यश्री को दिनभर भूंखा रख सकती है। 

साधना के बाद विधि तयकर निकलते हैं
आचार्यश्री विद्यासागर आहारचर्या के लिए सुबह नौ बजे के बाद निकलते हैं। अपने मुनि संग के साथ विद्यासागरजी सुबह साधना करते हैं और इसी बीच साधना के दौरान आहारचर्या के लिए उनके मन में आई विधि को लेकर वे श्रावकों के पास जाते हैं। ब्रम्हचारिणी वीणा दीदी के अनुसार आचार्यश्री के मन में आई विधि में कुछ भी हो सकता है और सबसे रोचक बात यह है कि सैकड़ों श्रावकों में यदि उनकी विधि नहीं मिलती तो वे भूखे ही वापस लौट जाते हैं। इसलिए श्रावक भी उनकी विधि के अनुरूप विभिन्न तैयारियों के बीच उनकी प्रतीक्षा करते हैं। आहारचर्या की तैयारी में श्रावक मंगल कलश, फल, श्रीफल, रंग-बिरंगे परिधान पहनकर तैयार होते हैं।

श्रावकों को इन नियमों का करना होता है पालन
ब्रम्हचारिणी वीणा दीदी के अनुसार आचार्यश्री की आहारचर्या संयमित है और वे फल, नमक, शक्कर, दूध, दही, मेवा, प्याज, लहसुन जैसी कई वस्तुओं का भोग नहीं करते हैं। इसके बाद श्रावकों को दाल, चावल व रोटी जैसे भोग तैयार करने होते हैं। वीणा दीदी के अनुसार आचार्यश्री की साधना को सफल बनाने के लिए श्रावक ये तैयारियां करते हैं। इन नियमों में सबसे पहले श्रावकों को स्वच्छ परिधान धारण करने होते हैं।

इसके बाद सभी आचार्यश्री का अभिवादन करते हुए उनका इंतजार करते हैं और जहां विधि मिलने पर आचार्यश्री रुकते हैं वहां श्रावक सबसे पहले उनकी तीन परिक्रमा लगाकर अपने चौके (भोजनशाला) में चलने के लिए आग्रह करते हैं। आचार्यश्री को चौके में ले जाकर उच्च आसान दिया जाता है और फिर उनके चरण धोकर भोजशाला में तैयार पकवान लाकर उन्हें दिखाए जाते हैं। उसमें से यदि कुछ उन्हें पसंद नहीं तो वे उसे अलग कर दिया जाता है। फिर उनकी इच्छानुसार हाथ में उन्हें भोजन दिया जाता है। ये सारी प्रक्रिया नौ नियमों में चरणबद्ध होती है। 

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