सुरम्या व परियों की पाती लोरी काव्य संग्रह का हुआ विमोचन

हिंदी लेखिका संघ का वार्षिक उत्सव

दमोह. साहित्य जगत में उपलब्धि पाने के लिए स्व लेखन की आवश्यकता है, वर्तमान दौर में कॉपी कट पेस्ट का चलन चल रहा है, जो साहित्य के मापदंड के हिसाब से नहीं है।
यह बात केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल हिंदी लेखिका संघ के वार्षिक अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि अनुभव किसी को गलतियां करने से नहीं रोक सकता है।
साहित्य जगत में दमोह को जो मुकाम मिलना चाहिए नहीं मिल पाया है। दमोह जिले का साहित्य के क्षेत्र में अलग योगदान रहा है। राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष लता वानखेड़े ने साहित्य जगत को समर्पित अपने दृष्टिकोण पर बात रखी। नपा अध्यक्ष मालती असाटी ने हिंदी लेखिका संघ के उत्कृष्ट कार्यों को मंच से रखा। हिंदी लेखिका संघ की अध्यक्ष पुष्पा चिले ने कहा कि कवि का हृदय मर्म स्पर्शी होता है।
पर्यावरण के प्रति चिंताओं को व्यक्त करते हुए लेखन किया जा रहा है। लेकिन इसके लिए धरातल पर पर्यावरण संरक्षित करने के लिए भी कदम बढ़ाने की जरुरत है।
सचिव प्रेमलता नीलम ने हिंदी लेखिका संघ द्वारा दिए जा रहे अलंकरण समारोहों के संबंध में अपनी बात रखी।
इस बार साहित्य सम्मान अलंकरण स्व. बनवारी लाल गुरु स्मृति अलंकरण सावित्री तिवारी के सौजन्य से डॉ. पीएल शर्मा दमोह को दिया गया।
स्व. रामकुंवर चिले स्मृति अलंकरण डॉ. रघुनंदन चिले के सौजन्य से मोहन शशि जबलपुर को दिया गया। स्व. रामप्यारी ताम्रकार स्मृति अलंकरण लक्ष्मी ताम्रकार के सौजन्य से महेश सक्सेना भोपाल को दिया गया।
स्व. सीताबेन पटेल स्मृति अलंकरण डॉ. अमीता बेन पटेल अहमादबाद के सौजन्य से चंद्रा नेमा दमोह को दिया गया। स्व. गुलाबरानी सोनी अलंकरण पुष्पा चिले के सौजन्य से डॉ. छविनाथ तिवारी को, स्व. रामकौमार स्मृति अलंकरण डॉ. इंद्रजीत कौर भट्टी के सौजन्य नरेंद्र दुबे को व स्व. काशीबाई स्मृति अलंकरण डॉ. प्रेमलता नीलम के सौजन्य से सुनीला सराफ सागर को दिया गया।
अंतर शालेय लोकगीत प्रतियोगिता में प्रथम आरोही राजपूत, द्वितीय प्रथा जैन, तृतीय रागिनी जैन, सांत्वना मानसी उपाध्याय व निशा पटेल को दिया गया। साथ ही सुरम्या व परियों की पाती लोरी काव्य संग्रह का विमोचन हुआ।
इसके बाद काव्य पाठ का आयोजन होगा। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रघुनंदन चिले, एनआर राठौर, श्यामसुंदर शुक्ला, किशोर केशु तिवारी, रामकुमार तिवारी सहित साहित्य जगत से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही।

Sanket Shrivastava
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