पर्याप्त मशीन नहीं होने की वजह से प्रभावित हो रहीं जांचें, एक जांच में लगता है एक घंटे का समय

एक दिन में आठ से दस जांच बमुश्किल से हो पा रहीं, जबकि सेंपल तीन गुना हो रहे, जिला अस्पताल में एक और जांच मशीन की दरकार

 

By: pushpendra tiwari

Published: 22 Jul 2020, 02:03 AM IST

दमोह. जिले में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिससे स्थिति बिगड़ रहीं हैं। इससे निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कोरोना वायरस की जांच के लिए लगातार सेंपल लिए जा रहे हैं। लेकिन बात जब कोरोना सेंपल की जांच की आती है, तो इस मामले में जिला अस्पताल बहुत पीछे है। कोरोना वायरस की जांच के लिए इस समय पूरे जिले में एकमात्र मशीन जिला अस्पताल में स्थापित है। इस मशीन से दिन भर आठ से दस सेंपलों की जांच हो पा रही है। एक सेंपल की जांच के लिए लगभग एक घंटा लग जाता है। ऐसे में लगातार मशीन से जांच करने पर दिन भर में बमुश्किल आठ से दस सेंपल्स की जांच हो पा रही है। बाकी सेंपल्स की जांच के लिए सागर भेजे जा रहे हैं। जिले भर से रोजाना औसतन 40 से 50 सेंपल कोरोना वायरस की जांच के लिए लिए जा रहे हैं। लेकिन इनकी जांच बहुत धीमी है। सबसे बड़ी वजह जिले में कोरोना वायरस की जांच के लिए एक ही मशीन है। इसलिए अधिकांश सेंपल जांच के लिए सागर भेजे जा रहे हैं। ऐसे में सेंपल की जांच का परिणाम आने में देरी हो रही है। सागर भेजे गए सेंपल्स में कई सेंपल की रिपोर्ट मिलने में एक सप्ताह तक लग गया। जिससे तमाम दिक्कतों का सामना सेंटर में भर्ती मरीजों के साथ स्वास्थ्य अमले को करना पड़ रहा है।
जानकारी अनुसार एक महिला मरीज की जल्द रिपोर्ट प्राप्त न होने के कारण उसे शहर के सेंट्रल स्कूल के पीछे बनाए गए कोविड केयर सेंटर में लगभग एक सप्ताह तक संदिग्ध मानकर रखा गया। लेकिन जब कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तब जाकर उसकी इलाज प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। यहां समस्या ये रही कि मरीज को लगभग एक सप्ताह तक संदिग्ध के रूप में रखा गया। जिससे तबीयत और खराब होने का खतरा बढ़ता रहा। यदि जिला अस्पताल में जांच के लिए एक और मशीन होती तो घंटे भर में रिपोर्ट मिल सकती है। जिससे पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों को तुरंत इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

कोरोना सेंपलिंग बढ़ी लेकिन जांच पहले की तरह
जिले में कोरोना वायरस को लेकर सेंपलिंग लगातार बढ़ रही है। लेकिन सेंपल की जांच बहुत धीमी है। जिले में कोरोना की जांच के लिए मार्च के महीने में रोजाना सेंपल की औसत संख्या एक.दो थी। जो लगातार बढ़ते.बढ़ते इस समय रोजाना औसत सेंपलिंग आधा सैकड़ा हो गई। लेकिन सेंपल की जांच में तेजी नहीं लायी गई। अभी जिला अस्पताल में जांच के लिए एक ही मशीन है। जबकि जिले में सेंपलिंग के हिसाब से दो मशीनों की जरूरत है।

अधिकांश जांच सागर में, जिससे रिपोर्ट में देरी
कोरोना की जांच के लिए जिले भर से लिए गए सेंपल में से लगभग ७० फीसदी सेंपल सागर भेजे जा रहे हैं। ३० फीसदी सेंपल की जांच जिला अस्पताल में संभव हो रही है। जांच के लिए सागर भेजे जाने वाले सेंपल्स की रिपोर्ट प्राप्त होने में औसतन तीन से चार दिन लग रहे हैं। जानकारी अनुसार कई बार तो रिपोर्ट एक सप्ताह तक लेट हुई है। जिससे पॉजिटिव पाए गए मरीजों की रिपोर्ट आने के पहले तक उनका इलाज संदिग्ध मानकर किया जाता है। लेकिन रिपोर्ट मिलने पर वह पॉजिटिव रहे। इस समस्या को खत्म करने के लिए जानकारों द्वारा जिला अस्पताल में दो मशीनों की जरूरत बताई जा रही है।
एक मशीन की कीमत करीब 15 लाख
इस समय जिला अस्पताल में कोरोना वायरस की जांच के लिए टूर्अंट मशीन स्थापित है। इसकी कीमत करीब 15 लाख रुपए बताई जा रही है। कोरोना वायरस की जांच के लिए टूर्अंट मशीन की तमाम खासियत हैं। इस मशीन से जांच रिपोर्ट एक से डेढ़ घंटे का वक्त लगता है। जबकि आरटी पीसीआर मशीन में एक सेंपल कि रिपोर्ट में 06 से 08 घंटे का समय लगता है। इस समय जिला अस्पताल में एक ही टूर्अंट मशीन है। लेकिन एक मशीन और उपलब्ध होने पर व्यवस्थाओं में काफी सुधार आ जाएगा।


वर्जन
कोरोना की जांच के लिए एक मशीन ही जिला अस्पताल को मिली है। जांच के लिए यदि एक मशीन की और उपलब्धता होती है, तो जांच में तेजी आएगी और रिपोर्ट दोगुनी हो जाएंगी।
डॉ. दिवाकर पटेल, जिला अस्पताल दमोह

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