बुंदेलखंड में नशामुक्त हो रहे हैं ग्रामीण युवा,यह है वजह

Rajesh Kumar Pandey

Publish: Feb, 15 2018 01:31:58 (IST)

Damoh, Madhya Pradesh, India
बुंदेलखंड में नशामुक्त हो रहे हैं ग्रामीण युवा,यह है वजह

धार्मिक संगठन की पहल पर आ रही है बदलाव की बयार

दमोह. बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में नशा तंबाकू, बीड़ी, शराब, गांजा की लत बाल्यावस्था से लेकर किशोरावस्था में ही लग जाती है। पारिवारिक माहौल में जर्दा खाने से शुरू होने वाली नशा की प्रवृत्ति शराब, गांजा व अन्य नशों तक ले जाती थी। पिछले 10 सालों में देखा जाए तो गांव का युवा नशे से अपना भविष्य बिगाड़ रहा था। ऐसे दौर में एक ऐसे संगठन का उदय हुआ जो धार्मिक आस्था के साथ लोगों को सद्मार्ग की ओर ले जा चुका है। अकेले दमोह जिले में 45 हजार से अधिक ऐसे युवा हैं, जिन्होंने अब चाय तक का नशा भी छोड़ दिया है।
भगवती मानव कल्याण संगठन के संस्थापक शक्तिपुत्र महाराज ने अपने संगठन की नींव उन क्षेत्रों से रखी जहां युवा सबसे ज्यादा नशे के आदी थे, इनकी लत से पारिवारिक माहौल में कलह और खुद के जीवन का कोई ध्येय नहीं था। संगठन के पांच सदस्यों ने इसकी शुरूआत की। इसके बाद गांव-गांव स्थिति ही बदल गई, जो कभी नशे की आदी थे अब वही नशे की प्रवृत्ति रोकने के पहरेदार बन गए हैं। पिछले एक साल में भगवती मानव कल्याण संगठन के इन युवाओं ने जिले में अवैध शराब बेचने वाले 200 से अधिक आरोपियों को जेल तक पहुंचाने में मदद की है।
भगवती मानव कल्याण संघ के मीडिया प्रभारी प्रमोद पटैल का कहना है कि नशा नाश का कारण है, संगठन के लोगों को देखकर आज का युवा स्वयं जागरुक हो रहा है। नशा से छुटकारा दिलाने में संगठन से ज्यादा शक्तिपुत्र महाराज का आशीर्वाद है, जिससे वर्तमान में दमोह जिले में युवाओं में देखा जा रहा है तो वे नशे की प्रवृत्ति से दूर हो रहे हैं। इस संगठन का एक सूत्रीय कदम है कि प्रदेश नशा मुक्त हो, नशा अकेले शराब का नहीं वरन तंबाकू, नशे की गोलियों, गांजा सहित अन्य मादक पदार्थ शामिल हैं। जिनसे युवाओं को दूर किया जा रहा है। हां यह सच है कि 45 हजार से अधिक युवाओं ने अपना जीवन नशा मुक्त बनाया है, जो पहले किसी न किसी नशा के आदी थे। इस कदम से अब यह हो रहा है कि आने वाली पीढ़ी को घर-परिवार में नशे के लत की पहली सीढ़ी तंबाकू नहीं मिलेगी तो वह आगे भी दूसरे नशे से बचे रहेंगे। इस संगठन में ऐसे हजारों युवा हैं, जिन्होंने चाय को भी एक नशा मानते हुए और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए उसका भी परित्याग कर दिया है।
पंजाब में मादक पदार्थो से लड़ रहा लड़ाई
भगवती मानव कल्याण संगठन के प्रांतीय अधिकारी अजय अवस्थी का कहना है कि जहां मप्र में तंबाकू, शराब, गांजा, अफीम का नशा किया जाता है। वहीं पंजाब में जानलेवा मादक पदार्थों के चंगुल में युवा पीढ़ी को फंसाया जा रहा है। जहां भगवती मानव कल्याण संगठन सबसे अधिक ताकत लगा रहा है। यहां भी हजारों युवा स्वयं नशा मुक्त होकर मादक पदार्थ विक्रेताओं के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं। जिससे अब यह कहा जा सकता है कि नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवा अपनी जिम्मेदारी निभाने लगे हैं और नशे की प्रवृत्ति से दूर होने के प्रयास में लगे हुए हैं।

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