नपाध्यक्ष की दोहरी नीति ने पार्टी पदाधिकारियों को बनाया घनचक्कर

बस स्टैंड निर्माण का मामला

By: pushpendra tiwari

Published: 03 Mar 2019, 04:05 AM IST

दमोह. शहर के पुराने बस स्टैंड पर ही नया बस स्टैंड निर्माण किया जाएगा, इस घोषणा को मूर्त रुप देते हुए दमोह विधायक राहुल सिंह द्वारा ०३ मार्च को भूमिपूजन कर बस स्टैंंड निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी। वहीं छह माह पहले बस स्टैंड निर्माण की आधारशिला सागर नाका के समीप दमोह-सागर-जबलपुर स्टेट हाइवे पर पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया द्वारा रखी गई थी। लेकिन सत्ता जाते ही भाजपा शासित नपा परिषद के मंसूबों पर पानी फिर गया। वहीं इस मामले में नपा परिषद सवालों के घेरे में आ चुकी है।


जिला भाजपा ने लगाए यह आरोप


भाजपा के जिलाध्यक्ष देवनारायण श्रीवास्तव ने बस स्टैंड निर्माण को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक राहुल सिंह द्वारा आमजन को पुराने बस स्टैंड पर ही नए बस स्टैंड निर्माण का भूमिपूजन कर गुमराह किया जा रहा है। पुराना बस स्टैंड जिस भूमि पर है वह नगरपालिका की नहीं है, इसलिए नपा द्वारा यहां बस स्टैंड का निर्माण नहीं कराया जा सकता।


मौके पर मौजूद नपाध्यक्ष मालती असाटी ने कहा कि विधायक राहुल सिंह व अन्य कांग्रेसियों द्वारा भूमिपूजन कार्यक्रम के आमंत्रण कार्ड वितरित किए गए हैं जिसमें परिषद के पदाधिकारियों के नाम लिखे गए हैं जबकि परिषद द्वारा बस स्टैंड निर्माण कार्य को लेकर कोई अनुमति नहीं दी गई है। मालती असाटी ने कहा कि नपा परिषद का नाम बगैर अनुमति के उपयोग किया गया है जबकि नपा द्वारा निर्माण कार्य को लेकर कोई टैंडर जारी नहीं किया गया न ही किसी निर्माण एजेंसी को नियुक्त किया गया है। मौके पर मौजूद अन्य भाजपाइयों ने कांग्रेस विधायक राहुल सिंह द्वारा मनमानी किए जाने का आरोप लगाया। नपा उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह चंदेल ने कहा कि भूमिपूजन के कार्यक्रम में परिषद का एक भी पदाधिकारी मौजूद नहीं रहेगा क्योंकि इस कार्यक्रम का आयोजन भाजपा शासित नगरपालिका परिषद द्वारा नहीं किया गया है, यह सिर्फ लोगों को भ्रमित करने की साजिश है जो कांग्रेस द्वारा रची गई है।


नपाध्यक्ष की दोहरी नीति


नपाध्यक्ष मालती असाटी पर इस मामले में दोहरी नीति अपनाने के आरोप भी लगे हैं। दरअसल एक ओर जहां बस स्टैंड निर्माण के होने वाले भूमिपूजन को वह परिषद की बगैर अनुमति के किए जाने की बात कह रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर शहर में इस कार्यक्रम के लगाए गए होर्डिंग्स में बकायदा इनकी फोटो चस्पा है और निवेदक में नपा परिषद के सभी पार्षद लिखा गया है। साथ ही जिला भाजपा के पदाधिकारियों ने नपाध्यक्ष असाटी से कहा कि कांग्रेसियों द्वारा यदि परिषद पदाधिकारियों का नाम आमंत्रण पत्र में बगैर अनुमति के लिखा है तो इसके विरुद्ध पुलिस कार्रवाई के लिए आवेदन दिया जाए। इस पर मालती असाटी की सहमति पर कलेक्टर के समक्ष एक ज्ञापन प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। लिहाजा भाजपा के पदाधिकारी ज्ञापन देने के लिए कलेक्ट्रेट निर्धारित समय पर पहुंच गए, लेकिन नपाध्यक्ष नहीं आईं। नपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित अन्य परिषद पदाधिकारियों के ज्ञापन देने नहीं पहुंचने पर जिला भाजपा के पदाधिकारियों को मायूस होकर कलेक्ट्रेट से वापस लौटना पड़ा। इधर आक्रोशित भाजपाइयों ने जब मामले की खोजबीन शुरु की तो यह सामने आया कि पुराने प्रस्तावों को आधार बनाकर बस स्टैंड निर्माण कार्य को हरीझंडी वर्तमान परिषद द्वारा दे दी गई है। इस जानकारी ने नपाध्यक्ष असाटी की दोहरी नीति को सबके सामने उजागर कर दिया।


निर्माण कार्य में यह बढ़ी बाधा


जिस भूमि पर बस स्टैंड निर्माण किया जाना है यह भूमि परिवहन विभाग के भू स्वामित्व में आती है। शहर की इस बेशकीमती जमीन को नपा द्वारा प्राप्त करने के लिए पूर्व में भी कई प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन वह असफल साबित हुए। नपा द्वारा यहां किसी प्रकार का निर्माण किया जाता है तो इसके लिए परिवहन विभाग से अनुमति लेना होती है, जो इस मामले में नहीं है। भाजपा के जिलाध्यक्ष देवनारायण श्रीवास्तव ने बताया है कि निर्माण कार्य के लिए परिवहन विभाग द्वारा अनुमति नहीं दी गई है उन्होंने इस बात की पुष्टि के लिए परिवहन अधिकारी से बात की थी। यहां यह जानना भी जरुरी है कि उक्त भूमि परिवहन विभाग को कोर्ट द्वारा अधिकृत की गई थी। दरअसल यह पूरी संपत्ति राज्य परिवहन निगम की थी, लेकिन जब राज्य परिवहन निगम बंद हुआ तो उस दौरान परिवहन विभाग का लाखों रुपए टैक्स निगम को देना था, जो नहीं चुकाया जा सका। जब यह मामला कोर्ट पहुंचा तो राज्य परिवहन के स्वामित्व की यह भूमि परिवहन विभाग को मिली। यहां पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य होता है तो परिवहन विभाग की अनुमति होना नितांत जरुरी है।

pushpendra tiwari Reporting
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