सरकारी खरीदी से टूटी उम्मीद, खलिहान से ही बेच रहे धान

25 नवंबर से होने वाली खरीदी 2 दिसंबर तक बढ़ी, रबी सीजन की तैयारी के लिए कर रहे रुपयों का इंतजाम

By: Sanket Shrivastava

Published: 27 Nov 2019, 08:18 AM IST

दमोह/ बम्हौरी माला. खरीफ सीजन की धान की फसल कटकर बोरियों में बंद हो चुकी है। किसानों ने खरीदी के लिए पंजीयन करा लिया है, लेकिन 25 नवंबर से होने वाली खरीदी 2 दिसंबर तक बढ़ गई है, जिससे किसान अब सरकारी खरीदी के इंतजार में नजर नहीं आ रहा है।
सबसे ज्यादा धान की पैदावार जबेरा विधानसभा क्षेत्र के बम्हौरी माला क्षेत्र में हुई है। इस बार अत्याधिक बारिश व माला जलाशय लबालब होने के कारण यहां का भूमिगत जलस्तर का लेबल भी बढ़ा रहा साथ ही नहरों से भी पानी मिलता रहा है।
जिससे यहां के किसानों ने धान की फसल की कटाई 15 दिन पहले करा ली थी, धान की बोरियां पैक करने के बाद यहां के किसान रबी सीजन की तैयारी में जुट गए हैं।
दी 40 किलो अब ले रहे 1 क्विंटल
खेत खलिहानों का भ्रमण करने पर एक बात का खुलासा हुआ कि धान की बोवनी के समय जिन किसानों के पास धान के बीज के लिए रुपया नहीं था, उन्होंने व्यापारियों से धान बोवनी के लिए उधार दी थी।
व्यापारियों ने इस करार से 40 किलो धान दी थी कि उपज आने के बाद 1 क्विंटल धान लेंगे। इस तरह व्यापारी किसानों के यहां पहुंचकर अपनी उधारी वसूलकर सैकड़ों क्विंटल धान एकत्रित करने में लगे हुए हैं।
रबी के लिए घाटे में बेच दी धान
सोमवार को बम्हौरी माला क्षेत्र का पत्रिका ने जायजा लिया तो किसान रबी सीजन के लिए खाद बीज व अन्य तैयारियों के लिए खलिहान से ही धान बेच रहे थे। व्यापारियों व किसानों के बीच मोल भाव चल रहा था, व्यापारी 1300 रुपए प्रति क्विंटल के भाव लगा रहे थे, जबकि किसान 1400 रुपए की बात कर रहे थे, फिर अनेक जगह 1300 व 1350 रुपए में सौदा तय हो गया। इस तरह किसानों ने घाटे में धान बेच दी। जबकि समर्थन मूल्य पर उनकी धान 1840 रुपए में खरीदी जानी है।
परेशानी से बचने व्यापारियों से सौदा
किसान हाकम सिंह व बिंदी ठाकुर सहित जितने भी किसान अपनी धान बेच रहे हैं उनका कहना है कि इस बार धान की खरीदी के लिए कई पचड़े लगाए जा रहे हैं, अब किसान के पास इतनी फुर्सत नहीं है कि वह रबी सीजन की फसलों को छोड़कर खरीदी केंद्रों के चक्कर काटता फिरे, क्योंकि यही समय बोवनी, बखरनी, दवाईयां डालने व सिंचाई का है, जिसमें सभी किसान व्यस्त हो गए हैं।
व्यापारी को हर तरफ से फायदा
किसानों व व्यापारियों के बीच जब बातों ही बातों में पत्रिका ने व्यापारी से फायदा नुकसान की बात छेड़ दी तो मौजूद किसानों ने कहा कि व्यापारी को कभी घाटा नहीं होता है, व्यापारी किसान की धान के साथ उसका पंजीयन भी ले लेता है और वह खरीदी केंद्र पर किसान के नाम से दोहरा लाभ अर्जित कर लेता है।
किसानों के हित में किसी का ध्यान नहीं
किसान सुरेश दुबे व लखन चक्रवती ने बताया कि सरकारी खरीदी के माध्यम से किसानों के हितों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। किसान की आर्थिक संपन्नता और बदहाली फसल कटने के बाद आती है। उन्हें बताया गया था कि 25 नवंबर से खरीदी होना है, जिसकी वह पूरी तैयारी कर रहे थे, अब खरीदी की तारीख 2 दिसंबर हो गई है। रबी सीजन की बोवनी शुरू हो गई है, इस फसल की तैयारी के लिए रुपयों की आवश्यकता है। इसलिए मजबूरी में व्यापारियों को अपनी धान बेच दी। घाटे के बारे में कहते हैं कि किसान की तकदीर में घाटा और परेशानी ही लिखी है तो क्या करें, किसान के हित और उसको समय पर रुपया मिले इसके बारे में सरकार ने अभी तक विचार नहीं किया है।
&धान खरीदी केंद्रों का निर्धारण किया जा रहा है। इसकी तैयारी की जा रही हैं। खरीदी केंद्रों का निर्धारण न होने के कारण 25 नवंबर से शुरू होने वाली खरीदी अब 2 दिसंबर से की जाएगी।
बीके सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी

Sanket Shrivastava
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