पक्का बनाने तोड़ा कच्चा, अब हो गए बेघर

600 आवास की छत बनाने की किस्त नहीं मिली

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 03 Jul 2021, 09:24 PM IST

दमोह/ पथरिया. प्रधानमंत्री आवास शहरी नगर परिषद पथरिया के तहत 600 हितग्राहियों को करीब 11 माह से छत बनाने के लिए किस्त नहीं मिल रही है। इन हितग्राहियों ने अपने कच्चे मकान इस आस से तोड़ दिए कि सिर पर पक्की छत हो जाएगी, लेकिन अब तक खुली छत ने ऐसे लोगों को अपने घरों से बेघर कर दिया है। कुछ आसपास टीन टप्पर डालकर गुजारा कर रहे हैं, जो बारिश में दुखदायी हो जाएगा।
पथरिया नगर परिषद के 600 हितग्राहियों को आवास योजना के तहत लाभ दिया गया। इन हितग्राहियों को पहली किस्त दी गई, जिससे लोगों ने अपने कच्चे मकान तोड़कर पक्के मकान के लिए नींव से लेकर दीवारें खड़ी कर ली थीं। खड़ी दीवारों को ढकने के लिए छत की दूसरी किस्त के लिए राशि के लिए अब इंतजार करना पड़ रहा है।
उधार लिया तो खरीखोटी सुन रहे
रूपेश पटेल का कहना है कि सरकारी किस्त का इंतजार करने के बजाए घर की छत के लिए निर्माण सामग्री के लिए इधर-उधर से कर्ज ली। निर्माण सामग्री भी उधारी में उठाई अब लंबा समय बीतने पर जिनसे कर्ज लिया उनकी खरीखोटी सुनने के अलावा उन्होंने चक्रवृद्धि ब्याज लगाना भी प्रारंभ कर दिया है। दुकानदार सरे राह उधारी के लिए टोक रहे हैं, जिससे अब मुंह छिपाना पड़ रहा है।
झोपड़ी लेना पड़ी किराए से
उत्तम बंसल, विजय बंसल व टेकचंद बंसल का कहना है कि पिछले 11 माह से आवास की छत नहीं बनी है। पास में ही एक कच्ची झोपड़ी किराए पर ली है, वहां पर गुजारा करना पड़ रहा है। घरवारी ताना देती है कि इस झोपड़ी से अपना कच्चा घर था जिसमें किराया तो नहीं लगता था। अब कमाई भी इतनी नहीं हो रही है कि किराया के साथ परिजनों को पेट भरा जाए।
लेटलतीफी ने बिगाड़ा बजट
हितग्राही पवन जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना अच्छी है, जिसके माध्यम से कच्चा घर पक्का हो रहा है, लेकिन इस योजना में राशि आने की लेटलतीफी से लोगों का बजट बिगड़ रहा है जिन लोगों की सीमित आय है, उससे बामुश्किल गुजारा होता है, उन्हें इधर-उधर किराए से रहना पड़ रहा है। पथरिया में किराए के मकान महंगे हैं, एक हजार से 2 हजार के बीच गरीबों को किराया कच्चे मकानों का ही चुकाना पड़ रहा है।
कार्यालय जाने पर मिलती है दुत्कार
हितग्राही बसोरी अहिरवार ने बताया कि पिछले 11 माह से नगर परिषद के सभी 600 लोग चक्कर काट रहे हैं, वहां पहुंचने पर दुत्कार मिलती है, सीएमओ कहते हैं कि सरकार पैसा नहीं दे रही है तो क्या हम अपनी जेब से पैसा डाल दें, फोन लगाओ तो सही जवाब नहीं देते हैं।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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