scriptCattle are dying in the four gram panchayats of the mountain above | ऊपर पहाड़ की चार ग्राम पंचायतों में मवेशियों की हो रही मौत | Patrika News

ऊपर पहाड़ की चार ग्राम पंचायतों में मवेशियों की हो रही मौत

दलदली तलैया में फंसकर हो रही मवेशियों की मौत

 

दमोह

Published: May 01, 2022 08:40:40 pm

दमोह. जबेरा विधानसभा क्षेत्र का ऊपर पहाड़ का जंगल जहां दो ग्राम पंचायतें जबेरा ब्लॉक की ओर दो ग्राम पंचायतें तेंदूखेड़ा ब्लॉक की आती हैं, वहां पर गर्मियों में लोग अपने मवेशी खुले में छोड़ देते हैं, इन मवेशियों को प्यास बुझाने के लिए गांव की सूख रहीं दलदली तलैया या नालियों का पानी ही उपलब्ध आ रहा है। चौरई ग्राम पंचायत के खमरिया गांव की दलदली तलैया में पानी के लिए घुसने वाले 30 मवेशियों की अब तक मौत हो चुकी है। जबेरा विधानसभा पहाडिय़ों व जंगलों से घिरा क्षेत्र हैं। यहां के ऊपर पहाड़ जो जबलपुर के कंटगी व पाटन क्षेत्र को कबर करता है, यहां पर गर्मियों में लोग अपने मवेशी छोड़ देते हैं, हजारों की तादाद में खुले में छोड़े जाने वाले मवेशियों को जंगल में भोजन उपलब्ध हो जाता है लेकिन उन्हें पानी नसीब नहीं होता है। ऊपर पहाड़ क्षेत्र के अंर्तगत दमोह जिले के जबेरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चौरई व कलूमर आती है। वहीं तेंदूखेड़ा ब्लॉक की सैलवाड़ा व रिचकुड़ी भी आती है। वर्तमान में चौरई ग्राम पंचायत के खमरिया गांव में एक तलैया है, खुले में छूटे हुए सैंकड़ों मवेशी इस तलैया और गांव से निकल रही गंदे पानी की नाली में प्यास बुझाने आते हैं। जो मवेशी तलैया के अंदर पानी पीने घुस रहे हैं, वह कीचड़ और दलदल में फंस रहे हैं, यदि खमरिया गांव के लोगों ने देख लिया तो वह निकाल लेते हैं, नहीं तो दलदली जमीन में फंसकर मवेशियों की मौत हो जाती है।
Cattle are dying in the four gram panchayats of the mountain above
Cattle are dying in the four gram panchayats of the mountain above
30 से अधिक कंकाल पड़े
आम आदमी के जबेरा विधानसभा प्रभारी बसंत राय ने ऊपर पहाड़ की ग्राम पंचायतों में मवेशियों की हो रही मौत की हकीकत जानने के लिए दौरा किया तो उन्होंने पाया कि खमरिया गांव के पास तलैया में मृत हुए मवेशियों के कंकाल पड़े हैं, जिन्हें जंगली जानवरों या आवारा श्वानों ने अपना भोजन बना लिया है। कुछ दो चार दिन पुराने मवेशियों के शव भी मिले। जिस समय वह दौरा करने पहुंचे तब एक गाय फंसी हुई थी, जिसे लोगों की मदद से निकाला गया। यह स्थिति अकेले खमरिया गांव की नहीं है, बल्कि ऊपर पहाड़ की चारों ग्राम पंचायतों की जहां इस गर्मी करीब 200 से अधिक मवेशियों की मौत प्यास से होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार जंगल, गांव के आसपास मवेशियों के मृत होने से दुर्गंध फैली रहती है।
एक हैंडपंप बिगड़ा तो 3 किमी पर पानी
खमरिया गांव में एक हैंडपंप है, यदि वह बिगड़ा तो 3 किमी देवरी गांव तक पानी भरने जाना पड़ रहा है। वर्तमान में हैंडपंप चलाने के लिए 2 लोगों की आवश्यकता पड़ रही है तब जाकर पानी निकल रहा है।
तालाब निर्माण की सालों पुरानी मांग
आप विधानसभा प्रभारी बसंत राय ने बताया कि ऊपर पहाड़ पर मवेशियों व वन्य प्राणियों की प्यास बुझाने के लिए तालाब निर्माण कराए जाने की मांग की जा रही है। जिले में जल जीवन मिशन के तहत 100 तालाब स्वीकृत हुए हैं, लेकिन जिन जगह सालों पुरानी मांग है वहां पर तालाबों का निर्माण नहीं किया जा रहा है। खासतौर पर भाजपा सरकार के राज में आदिवासी इलाकों की उपेक्षा की जा रही है।
 

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