नगर को स्वच्छ करने का जिम्मा संभाला नपा का आंगन मैला

बाहर दिख रही सफाई, पीछे दिख रहे बजबजाती गंदगी के दाग

By: Rajesh Kumar Pandey

Updated: 08 Oct 2021, 09:20 PM IST

दमोह. स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 की रैकिंग के लिए फिर से मैराथन शुरू हो गई है। शहर को स्वच्छ शहरों की सूची में शुमार कराने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। वहीं जिस नगर पालिका परिषद के ऊपर सफाई का जिम्मा है, उसी के पीछे वाले हिस्से व परिसर में गंदगी फैली हुई है। ऐसा ही हाल शहर का है बाजार व सार्वजनिक स्थान साफ हैं तो अंदरुनी गलियां व मोहल्लों में गंदगी की भरमार है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 के लिए अब कवायद शुरू हो गई है। भारत सरकार द्वारा स्वच्छता गतिविधियों के अंतर्गत डोर-टू-डोर कलेक्शन सोर्स सेग्रीगेशन सॉलिडवेस्ट मैनेजमेंट, रोड नालियों की स्थिति, स्वीपिंग, सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालयों का संचालन ओपन डेफिकेशन, ऐनिमल वेस्ट, स्ट्रीट लाइट, गार्डन व पार्क के मैंटेनेंस, वॉटर सप्लाई, चौराहों का सौंदर्यीकरण की गतिविधियां शामिल की गई है। शहर को 39 वार्डों के 3 जोन में बांटा गया हैं। जिसकी जिम्मेदारी संयुक्त कलेक्टर अविनाश रावत, डिप्टी कलेक्टर भव्या त्रिपाठी व डिप्टी कलेक्टर अदिति यादव को दायित्व सौंपे गए हैं।
सबसे गंदे के बाद अंडर 100 में
स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत 2014 से हुई थी। इस पहले सर्वेक्षण में दमोह देश के सबसे गंदे शहरों में शामिल हुआ था। 2015 व 2016 स्वच्छता सर्वेक्षण में दमोह शामिल नहीं किया गया था। 2017 के स्वच्छता सर्वेक्षण में देश 434 शहरों में 242 रैकिंग मिली थीं। 2018 के स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के 4203 में से 103 रैकिंग हमें मिली थी। 2019 में टॉप 100 शहरों की सूची में दमोह शामिल हो गया था। 2020 में दमोह शहर 78 वें नंबर था। वहीं 2021 में 80 नंबर पर था।
पूर्व की तरह इस बार भी हो रही चूक
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षणों में देखने में आया है कि आगे पाठ, पीछे सपाट की तर्ज पर शहर की मुख्य सड़कों पर रात, सुबह, दोपहर 3 वक्त झाड़ू लगाई जाती है, स्मारकों को रोज धुलवाया जाता है। इसी तरह सरकारी कार्यालयों के साथ स्वयं नगर पालिका परिषद कार्यालय की स्थिति है आगे तो सफाई रखी जाती है, लेकिन पीछे कचरा जमा रहता है। स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के कई सदस्य आगे की बजाए पीछे वाले व हिस्सों व अंदरुनी क्षेत्रों में अपनी निगाह गड़ाते हैं, जिससे दमोह को मिलने वाली रैकिंग कम हो जाती है, पिछली चूकों के अनुसार इस बार भी वही गलती दोहराई जा रही है।
बारिश गई, मैदानों में कीचड़ अब भी जमा
शहर में बारिश के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। गंदे पानी की निकासी के लिए नपा ने करोड़ों रुपए के बिलों का भुगतान कर दिया है, लेकिन वार्डों यहां तक नगर पालिका परिषद के आंगन यानि पीछे के हिस्से से पानी निकासी नहीं हो पाई है। इसके अलावा कॉलोनी क्षेत्र, वार्डों के अंदर खाली मैदानों व प्लाटों में बारिश का पानी जमा है, जो अभी कीचड़ के रूप में दिखाई दे रहा है। जिसके कारण यहां गंदगी के साथ ही मच्छरों के बढऩे से वायरल सीजन की बीमारियों के साथ ही पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड़ते हुए डेंगू भी बढ़ रहा है, जिसके कारण शहर वासी बीमार हो रहे हैं।
गंदी बस्तियां अब तक नहीं हो पाई स्वच्छ
दमोह शहर के 10 से अधिक वार्ड मलिन व गंदी बस्तियों में शामिल किए गए थे। यहां स्वच्छता अभियान के तहत शौचालयों का निर्माण भी किया गया लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की तरह शहरी शौचालय निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। जिससे सुबह शाम इन बस्तियों में खुले शौच की प्रवृत्ति अब भी दिखाई देती है। रेलवे लाइन के किनारे खुले में शौच के लिए सुबह-शाम लोग आते जाते दिखाई दे जाते हैं।

Rajesh Kumar Pandey Desk
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