बचत के दूध से चल रहे शीत दुग्ध केंद्र

फिर विदेशी दूध पाउडर की क्या आवश्यकता

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 26 Jun 2020, 07:07 AM IST

दमोह. लॉकडाउन के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र के दमोह में लोकल सस्ता दूध उपलब्ध हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा दूध पाउडर का आयात किया जा रहा है। जिसको लेकर अब कस्बाई क्षेत्रों में विरोध होने लगा है। अनेक किसान संघ विदेशी महंगे दूध पाउडर के आयात को लेकर स्वदेशी विचारधारा पर कुठाराघात मान रहे हैं। दमोह जिले की बात करें तो लॉकडाउन से लेकर भरपूर दूध का उत्पादन हो रहा है। बचत के बाद शीत दुग्ध इकाईयों के लिए करीब 1500 लीटर दूध प्रतिदिन पहुंचाया जा रहा है।
विभिन्न डेयरी संचालकों व दुग्ध किसानों के अनुसार बुंदेलखंड क्षेत्र का दमोह जिला दुग्ध उत्पादन के मामले में आत्म निर्भर हो रहा है। दमोह जिले के दमोह व हटा में शीत दुग्ध केंद्र चल रहे हैं। पशु पालन के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाने के लिए पशु किसान क्रेडिड योजना के माध्यम से किसानों की आर्थिक उन्नति के प्रयास किए जा रहे हैं। दमोह जिले में दूध के अधिकत्तम दाम 60 रुपए प्रति लीटर है। लॉक डाउन के दौरान जिले में दूध की कमी नहीं आई, उल्टे किसानों का दूध बच रहा था। जिसका कारण यह था कि होटलें बंद थी, सबसे ज्यादा दूध की खफत चाय की होटलों में होती है। इन होटलों में कभी भी दूध पाउडर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जब सस्ता दूध हमारे पास हर जिले व ब्लॉक में उपलब्ध है तो ऐसे में दूध पाउडर का आयत किसी के गले नहीं उतर रहा है।
1500 लीटर बचत का दूध
दमोह व हटा में दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दूध एकत्रित किया जाता है। जो शीत दुग्ध केंद्र पहुुंचाया जाता है, यह किसानों के उपयोग व डेली विक्रय के बाद बचत का दूध होता है जो बुंदेलखंड शीत दुग्ध केंद्र पहुंचाया जा रहा है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है, जमीनी स्तर पर दूध का उत्पादन कम नहीं हुआ है। सरकार ने गलत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर देश में दूध की कमी मानी और विदेशी दूध पाउडर का आयात करा लिया।
अमेरिका दवाब में फिजूल खर्च
पूर्व को-ऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष गौरव पटेल कहते हैं कि वह स्वयं दुग्ध किसान हैं, जब वह अध्यक्ष थे तो उन्होंने जिले में सर्वाधिक हो रहे दूध उत्पादन को मार्केट दिलाने प्रयास किए थे। लॉकडाउन में दूध की कमी नहीं हुई है। हां गर्मियों में उत्पादन कम होता है, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि लोगों को दूध पाउडर का उपयोग दूध के लिए करना पड़ा हो। इस निर्णय से पशु दुग्ध किसानों को आत्मनिर्भर बनाने वाले कदमों को झटका लगेगा।
विदेशी आर्थिक मंदी दूर करने की कोशिश
कांग्रेस किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष नितिन मिश्रा का कहना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आर्थिक उन्नति कर रहा है, गांव-गांव समितियां बनी हैं, दुग्ध किसान बचत का दूध जमा कर रहे हैं। हमारे आसपास सस्ता दूध है तो विदेशी महंगे दूध पाउडर की क्या आवश्यकता है। लॉकडाउन में आर्थिक मंदी से देश की कमर टूट रही है, ऐसे हालात में विदेशी देश की आर्थिक मंदी दूर करने के लिए दूध पाउडर का आयात औचित्य हीन है।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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