अच्छी खबर: गांव की बेटी को 12 वीं के बाद नहीं छोडऩी पड़ेगी पढ़ाई, गांव में ही मिल जाएगी स्नातक की डिग्री

ग्रामीण परिवेश में लड़कियां 12 वीं स्कूल की पढ़ाई के बाद आगे कॉलेज स्नातक की डिग्री से वंचित हो जाती हैं, ऐसी छात्राओं को यह वर्क करने पर घर बैठे कॉले

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 11 Sep 2017, 04:01 PM IST

राजेश कुमार पांडेय @ दमोह. ग्रामीण परिवेश की स्कूली शिक्षा 12 वीं तक पढ़ाई के बाद अधिकांश ग्रामीण लड़कियां शहरी क्षेत्र में जाकर कॉलेज की स्नातक की डिग्री हासिल करने से वंचित रह जाती हैं। मप्र की सरकार ने एक अभिनव पहल शुरू की है, अब वह तीन साल तक गांव में ही इन लड़कियों से पढ़ाई कराने के लिए इनसे एक जॉब कराएगी, जिसका कोई मानदेय या वेतन भत्ता नहीं देगी, अलबत्ता ऐसी लड़कियों के लिए उनके गांव में ही स्नातक की डिग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराएगी।
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 साल तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए अब हर केंद्र पर आंगनबाड़ी दीदी की नियुक्ति की जाएगी। आंगनबाड़ी दीदी को पढ़ाने के एवज में कोई वेतन, भत्ता तो नही मिलेगा, बल्कि स्नातक की डिग्री जरूर दी जाएगी। सरकार मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व योजना के तहत होने वाले कोर्स में दीदी का सहयोग करेगी। हालांकि अभी ये स्पष्ट नही है कि ये सहयोग कैसा होगा।
दरअसल आंगनबाड़ी केंद्रों पर नर्सरी की पढ़ाई शुरू करा दी गई है, लेकिन अधिकांश जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 5 वीं या 8 वीं पास हंै। ऐसे में यह कार्यकर्ता बच्चों को पढ़ाई नहीं करा सकती हैं। इस कारण बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी दीदी नियुक्त करने का फैसला लिया गया है।
उदाहरणार्थ मप्र के दमोह जिले के हटा अंतर्गत संचालित 210 आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगनबाड़ी दीदी के चयन के लिए स्थानीय बालिकाओं, महिलाओं से निर्धारित प्रारूप में आवेदन सीधे परियोजना कार्यालय हटा में 15 सितंबर तक निर्धारित कार्यालयीन समय प्रात: 11 से 4 बजे तक आमंत्रित किए गए हंै।
ऐसे होगा दीदी का चयन
आवेदिका स्थानीय होना चाहिए, अर्थात जिस केंद्र के लिए आवेदन कर रही है, उसी ग्राम का निवासी होना चाहिए, जिसके प्रमाण के लिए शासन स्तर पर मान्य कागज प्रस्तुत करना होगा। शैक्षणिक योग्यता 12 वीं पास होना अनिवार्य है।
तीन साल पढ़ाना होगा-
स्नातक डिग्री वाले आवेदकों को कम से कम तीन साल तक पढ़ाना जरूरी होगा। पढ़ाई के दौरान ही समय समय पर परीक्षा भी होगी। एग्जाम की तैयारी के लिए विभाग सहयोग करेगा। इसके लिए बाकायदा कक्षाएं संचालित की जाएंगी। लेकिन कम से कम तीन साल आवेदक को आंगनबाड़ी केंद्र पर पढाना होगा, तभी समाज कार्य में स्नातक डिग्री मिल सकेगी।
योजना से फायदा
ग्रामीण क्षेत्रों में कई युवतियां व महिलाएं ऐसी हंै जिन्होंने 12 वीं बाद पढ़ाई छोड़ दी है, वे अब स्नातक डिग्री कर सकेंगी। इससे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्कूल पूर्व शिक्षा दी जाएगी। इससे बच्चों का शैक्षणिक स्तर भी सुधरेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चो की संख्या बढ़ेगी।
वर्जन
आंगनबाडिय़ों में बच्चें को शिक्षा देने के लिए दीदी की नियुक्ति होगी। इस संबंध में राज्य शासन से निर्देश आ चुके है, नियुक्तियों पर काम शुरू हो चुका है।
शिव राय, महिला बाल विकास अधिकारी हटा

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