दूषित मध्याह्न भोजन के मामले में सख्त हुआ प्रशासन, जानिए किस पर क्या हुई कार्रवाई

दूषित मध्याह्न भोजन के मामले में सख्त हुआ प्रशासन, जानिए किस पर क्या हुई कार्रवाई

Laxmi Kant Tiwari | Publish: Jul, 14 2018 11:28:49 AM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

दूषित मध्याह्न भोजन का मामला

दमोह. शहर से लगे दमोह जनपद के मारुताल स्कूल में मध्याह्न भोजन करने के बाद ६१ बच्चे बीमार हो गए थे। उसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बीआरसी ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन का संचालन करने वाले समूह का टैंडर निरस्त कर दिया है।

शुक्रवार को बीआरसी पदमसिंह ने स्कूल पहुंचकर आगे की जांच की। जिन्होंने बताया कि स्कूल में पदस्थ सभी पांचों शिक्षकों तथा दो जन शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह इतनी बड़ी घटना घटित हुई। यह घोर लापरवाही का कारण आखिर क्या है। जवाब मांगे जाने के बाद आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
अब स्कूल प्रबंधन करेगा मध्याह्न भोजन की व्यवस्था-
मध्याह्न भोजन में खाने के बाद १०९ में से ६१ बच्चों के बीमार होने के बाद मध्याह्न भोजन का संचालन करने वाले अंजनी स्व सहायता समूह का टैंडर निरस्त कर दिया है। अब स्कूल प्रबंधन के लिए आदेश दिया है कि वह स्वयं मध्याह्न भोजन की व्यवस्था कराएंगे। स्वयं की देखरेख में भोजन बनवाने के साथ उसे शिक्षक स्वयं टेस्ट करेंगे उसके बाद बच्चों को भोजन कराया जाएगा। पूरे मामले की जांच एडीएम व जिला पंचायत सीईओ आनंद कोपरिहा के आदेश पर तहसीलदार के माध्यम से भी जांच कराई जा रही है। जांच प्रतिवेदन आने के बाद पूरे मामले में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानिए क्या है पूरा मामला-
शहर से लगे दमोह जनपद क्षेत्र के मारूताल के मिडल स्कूल में मध्याह्न भोजन करने से ६१ बच्चे गुरवार ाके बीमार हो गए थे। गुरुवार दोपहर दो बजे के लगभग रोज की तरह मध्याह्न भोजन वितरित किया गया था। जिसमें कड़ी-चांवल वितिर होने के बाद कक्षा छटवीं से आठवीं तक के १०९ में से ६१ बच्चों को ने भोजन किया था। भोजन करने के कुछ देर बाद ही बच्चों को उल्टियां होने लगीं थीं। क्लास टीचर सहायक शिक्षिका सविता शुक्ला ने बच्चों को उल्टियां करते हुए देखकर उन्हें जिला अस्पताल लाईं थीं। जिन्होंने बच्चों को भर्ती कराया था। वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी लगने के बाद वह भी जिला अस्पताल पहुंचे थे। वाहन १०८, डायल-१०० को भी के माध्यम से बच्चों को भर्ती कराया था। जहां पर प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर मामले की जानकारी ली थी। कुल ६१ बच्चों का इलाज भी जिला अस्पताल में कराया गया था। जिसके बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए थे। जिसमें एडीएम आनंद कोपरिहा के निर्देशन में तहसीलदार ने पहुंचकर जांच प्रतिवेदन तैयार करना शुरू कर दिया था।

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