इस जिले में कुपोषण का शिकार हो रहा गौवंश

भूख मिटाने कंकड़-पत्थर चाटने से संक्रमण की चपेट में

By: lamikant tiwari

Published: 16 May 2018, 10:49 AM IST

दमोह/मडिय़ादो. लाखों रूपए खर्च करके क्षेत्र में संचालित हो रहे गौसदन गौवंश को बचाने में असफल दिख रहे हैं। लगातार क्षेत्र में गौवंश की मौतें हो रही हैं। अंचल में सैकड़ों मवेशी कुपोषण की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इनको पर्याप्त भोजन है ना पानी नतीजतन इन कमजोर मवेशियों को कमजोरी के अकाल मौत लील रहीं हंै।
पठारी क्षेत्रों में हलात खराब-
सबसे अधिक समस्या वनांचल क्षेत्र के बछामा, मदनपुरा, स्यामरसिंघी, उदयपुरा, कलकुआ, घोघरा, जुनेरी, मजरा, कारीबरा, झौंदा, इमलिया, अमझिर, नारायणपुरा, ढूला ढौरिया आदि गावों में देखने मिलती है। यहां के गांवों में मवेशियों को चारा के साथ पीने के पानी की भी किल्लत है। मवेशी हैंडपंपों के पास बूंद-बूंद पानी को चूसते देखे जाते हैं। कई मवेशी तो पानी की कमी और भूख से अकाल मौत के मुंह चले जाते हैं।

रेत और मिट्टी में तलास रहे भोजन-
जंगलों में अवैध कटाई के चलते बैसे ही वीरानी दिखाई दे रही है। पशु पालकों के पास स्वयं पशुओं को चारा जुटापाना इस महंगाई के दौर में टेड़ी खीर है। परिणाम स्वरूप पशु पालक मवेशियों को सुबह से जगलों की और हांक देते हैं। बारिश और ठंड के मौसम में तो मवेशियों को जंगलों में भोजन की व्यवस्था जैसे-तैसे हो जाती है। लेकिन गर्मिंयों में जंगल वीरान हो जाते हैं। चार माह पहले ही मवेशी अपना भोजन बना चुके होते हैं। ऐसे में मवेशियों को पेट भरने के लिए सूखी जमीन पर रेत और मिट्टी में शेष रह गए सूो घास के टुकड़ों से पेट भरना पड़ता है। जिसमें चारा के साथ मिट्टी और रेत भी मवेशियों का भोजन बन रही है। जानकारों की माने मवेशियों को चारा के साथ मिट्टी और रेत खाने से उनके दांत खिस जाते हंै, जिससे फिर वह भोजन नहीं कर पाते और बीमार होने लगते हैं। परिणाम स्वरूप गौवंश कुपोषण का शिकार हो कर समाप्त हो रहा है।
जागरूकता की कमी-
पशु चिक्तिसक डॉ. प्रभूदयाल छिरौल्या की मानें तो मवेशियों की अधिकतर मौत फूटपाईजनिग के कारण होती है। लोग पॉलीथिन में खाद्य पादार्थ आदि फेकते हैं। जिसे खाकर बीमार हो जाते हैं। दूसरी और चारा की कमी के कारण मवेशी रेत, मिट्टी, पत्थर आदि चाटने के कारण भी संक्रमण के शिकार होकर बीमार होते हैं। इसके लिए पशु पालकों को मवेशियों की देखरेख करना जरूरी है।
यहां दामोतिपुरा में जल संकट दूर करने जनप्रतिनिधियों के प्रयास तेज-
-ग्राम पंचायत दामोतिपुरा के लोग भीषण जल संकट से जूझ रहे हंै। इस मामले में पत्रिका ने लगातार खबरें भी प्रकाशित की थीं। जिसमें 22 अप्र्रैल को पत्रिका ने 'बांध में एक बूंद नहीं पानी,हैंडपंप बंदÓ शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया था। जिसके बाद विधायक सहित अन्य ने पहुंचकर समस्या का समाधान कराने प्रयास तेज किए।
खबर प्रकाशित होने के बाद हटा विधायक उमादेवी खटीक, जिपं. अध्यक्ष शिवचरण पटैल, जपं. अध्यक्ष प्रतिनिधी संदीप राय उपाध्यक्ष बद्री व्यास, हल्का पटवारी के साथ गांव पहुंच कर ग्रामीणों से रूबरू हुई एवं ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। सभी ने बताया कि यहां के लोग गर्मियों में भीषण जल संकट से जूझते हैं। ग्रामीणों की मांग थी कि गांव में कोई बड़े तालाब का निर्माण करा दिया जाता तो निश्चित ही जल संकट से निजात मिल जाएगी। ग्रामीणों की मांग पर मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों को सरपंच ने वह स्थान बताया जहां पर जलाशय के निर्माण होने से ग्रामीणों की समस्या दूर हो सकती है और पीने के पानी के साथ सिंचाई का रकवा भी बढ़़ सकता है।
मौक पर मौजूद पटवारी ने चयनित जमीन का अवलोकन किया जिसमें बताया कि राजस्व की भूमि के साथ फारेस्ट की भूमि का भी कुछ हिस्सा आ रहा है।
जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधी संदीप राय ने बताया जलाशय के निर्माण होने के बाद ग्रामीणों को हमेशा के लिए जलसंकट से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन चयनित भूमि का कुछ हिस्सा फारेस्ट विभाग के आधीन है। अगर फारेस्ट विभाग से एनओसी मिलती है तो यहां बड़े जलाशय की संभावना है। उन्होंने बताया सभी लोग मिल कर प्रयास कर रहे हंै फारेस्ट विभाग की सहमति से यहां जलाशय का निर्माण कराएगें।

 

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