जानिए आखिर क्यों डिलेवरी के तुरंत बाद महिला को पुलिस कोतवाली जाना पड़ा

प्रसव के लिए भर्ती हुई महिला के परिजनों व अस्पताल स्टॉफ में हुआ विवाद

By: pushpendra tiwari

Published: 24 May 2018, 12:55 PM IST

दमोह. जिला अस्पताल प्रबंधन की कारगुजारियों का खामयाजा आए दिन जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है। बुधवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया जिसमें प्रसव के लिए भर्ती हुई महिला के डिस्चार्ज दस्तावेज व जांच रिपोर्ट लेने पहुंचे परिजनों से अस्पताल के डॉक्टर व अन्य स्टॉफ के लोग उलझ गए। मामला इस कदर तूल पकड़ा कि स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को आना पड़ा। बताया गया है कि जिला अस्पताल में तीन दिन तक भर्ती रही एक महिला ने प्रसव के बाद मृत बच्चे को जन्म दिया, लेकिन इस मामले में परिजनों का आरोप है कि गर्भ में बच्चे की मौत अस्पताल स्टाफ की लापरवाही का नतीजा है।


ये है मामला


शहर के गढ़ी मोहल्ला निवासी महिला अमरीन बानो पति शहजाद खान को प्रसव पीड़ा होने पर चार दिन पहले २० मई की सुबह करीब १० बजेे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। भर्ती रही महिला के भाई आमिर ने बताया कि जिला अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर सुनीता तंतुवाय ने कहा कि महिला को अस्पताल में भर्ती कर दो डिलेवरी का समय हो गया है। २१ मई को पुन: डॉ. सुनीता तंतुवाय द्वारा महिला की जांच की गई और डॉक्टर द्वारा कहा कि इंतजार करो। वहीं रात करीब ९ बजे स्टॉफ नर्सों ने कहा कि महिला की सोनोग्राफी करा लो, जच्चा व बच्चा की स्थिति ठीक नहीं लग रही है। नर्सों के कहने पर परिजन अमरीनबानों को लेकर शहर के एक निजी क्लीनिक सोनोग्राफी कराने ले गए, जहां सोनोग्राफी रिपोर्ट से पता चला कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है। परिजन महिला को लेकर पुन: जिला अस्पताल वापस आ गए और रिपोर्ट देकर गर्भ में बच्चे के मृत होने की जानकारी दी व महिला का उपचार शुरू कराया। २२ मई की सुबह ८.३० बजे जब डॉक्टर सुनीता तंतुवाय अस्पताल आईं तो परिजनों ने कहा कि अमरीनबानो के गर्भ में मृत बच्चा है। इसके बाद करीब १० बजे महिला का सीजर कर मृत बच्चे को गर्भ से निकाला गया। सीजर के बाद डॉक्टर तंतुवाय ने मरीज की मौसी से कहा कि उन्हें पता था कि बच्चे की तीन दिन पहले मौत हो चुकी है। इसी बात को लेकर परिजनों ने डॉक्टर तंतुवाय से कहा कि जब इस बात की जानकारी पहले से थी तो यह क्यों कहा गया कि बच्चा गर्भ में स्वस्थ्य है और डिलेवरी का इंतजार करो। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस हो गई और डॉक्टर तंतुवाय मौके से चलीं गईं।


सीएमएचओ से की लिखित शिकायत


परिजनों ने २२ मई को अमीरबानों का सीजर होने के बाद डॉक्टर द्वारा उपचार रखी गई सेवा में कमी को लेकर सीएमएचओ डॉ. आरके बजाज के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की।


२३ मई को रिपोर्ट मंगाने पर दोनों पक्षों में विवाद


२३ मई की दोपहर महिला के डिस्चार्ज होने पर परिजनों ने मौजूद स्टॉफ से अब तक की जांच रिपोर्ट व डिस्चार्ज रिपोर्ट दिए जाने की बात कही। लेकिन स्टॉफ व मौजूद डॉक्टर द्वारा यह कह दिया गया कि पहले सीएमएचओ के समक्ष की गई रिपोर्ट वापस लेना होगी तभी दस्तावेज दिए जाएंगे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई और स्टॉफ ने परिजनों के साथ धक्का मुक्की कर दी। खासबात यह है कि इस मौके पर सिविल सर्जन डॉक्टर ममता तिमौरी भी मौजूद होना बताईं गईं हैं।


मौके पर पहुंची पुलिस


हंगामा होने की जानकारी मिलने पर जिला अस्पताल पुलिस चौकी के सुरक्षाकर्मी व अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड मौके पर पहुंच गए और दोनों पक्षों को अलग-अलग किया। इस घटना के बाद पीडि़त महिला अमरीनबानो अपने परिजनों के साथ सिटी कोतवाली डॉक्टर व स्टॉफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंची। कोतवाली पुलिस ने पीडि़त पक्ष से एक लिखित आवेदन लिया है। विदित हो कि पीडि़त महिला व उसके परिजन मामले में कार्रवाई की उम्मीद लगाकर कलेक्टर के समक्ष भी पेश हुए हैं।


यह सवाल मांग रहा जबाव


इस मामले में सिविल सर्जन डॉक्टर ममता तिमौरी द्वारा कहा गया है कि परिजन महिला को लेकर जांच कराने के लिए निजी क्लीनिक ले गए थे, लेकिन यहां सवाल यह है कि जिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली अधिकांश महिलाओं को प्रसव से कुछ देर पहले निजी क्लीनिक या सोनोग्राफी सेंटर ले जाया जाता है, वजह यह है कि जिला अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं है। अब इस स्थिति में अमरीनबानो के परिजन अस्पताल नर्सों के कहे अनुसार ही तो मरीज की सोनोग्राफी कराने निजी क्लीनिक गए थे। विदित हो कि जिला अस्पताल में यह ऐसा पहला मामला नहीं है बल्कि आए दिन ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनके घटित होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

वर्जन

परिजनों द्वारा गलत आरोप लगाए जा रहे हैं, वह जिला अस्पताल में भर्ती महिला की जांच कराने के लिए निजी अस्पताल ले गए थे, बच्चे की गर्भ में मौत हुई है, इसमें डॉक्टर की कोई गलती नहीं है।
डॉ. ममता तिमौरी, सीएस जिला अस्पताल

pushpendra tiwari Reporting
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