Breaking News खुलासा : मप्र के दमोह जिले में डेंगूू का प्रकोप, तीन की जा चुकी है जान, स्वास्थ्य अमले ने उठाए ये कदम

जानलेवा डेंगू की जद में आए 277 ग्रामीण

By: pushpendra tiwari

Updated: 24 Jul 2018, 11:34 AM IST

दमोह. जिले के तेंदूखेड़ा तहसील अंतर्गत हाथी हरदुआ हाथीघाट गांव में सोमवार को बृहद स्वास्थ्य कैंप लगाया गया था। इस कैंप में 277 मरीजों को बुखार से पीडि़त पाया गया जिनकी जांचे कर जीवन रक्षक दवाएं दीं गईं थीं। दरअसल गांव में स्वास्थ्य कैंप लगाए जाने की नौबत तब पड़ी जब एकाएक तीन लोगों की तेज बुखार से मौत हो गई और सैकड़ों लोग बुखार की चपेट में आ गए। मौके पर पहुंची स्वास्थ्य टीम पहले दिन इस बात का पता नहीं लगा पाई थी कि गांव में आखिर किस बीमारी का प्रकोप फैल गया है और स्वास्थ्य अधिकारी भी सकते में पड़े हुए थे। लेकिन जब मंगलवार को बीमार मरीजों की खून की जांच की रिपोर्ट प्राप्त हुई तो गांव की आधे से अधिक आबादी डेंगू बुखार की जद में पाई गई।


सीएमएचओ डॉ. आरके बजाज ने पत्रिका को बताया है कि जिला अस्पताल की लैब से 19 मरीजों के खून की जांचें की गईं थीं जिनमें से 3 डेंगू पॉजीटिव निकले हैं व सैकड़ों मरीजों में इस बुखार के लक्षण पाए गए हैं जिनका उपचार जारी है। डॉ. बजाज ने बताया है कि अन्य मरीजों के सेंपल भी जबलपुर भेजे गए हैं।


पांच दिन तक जारी रहेगा कैंप


हरदुआहाथी घाट में जानलेवा बीमारी की वजह से तीन की मौत हो जाने की खबर मिलने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर गांव में स्वास्थ्य कैंप लगा दिया गया था। पहले दिन सैकड़ों की भीड़ जांच कराने पहुंची, जांच कराने पहुंचे सभी मरीज बुखार से पीडि़त हैं इनमें वृद्ध महिलाएं व बच्चों की संख्या अधिक है। डॉ. आरके बजाज ने बताया है कि आगामी 5 दिनों तक गांव में स्वास्थ्य कैंप संचालित रहेगा। वहीं उन्होंने बताया कि जिन मरीजों की स्थिति अधिक खराब होना सामने आ रही है उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।

 

विदित हो कि गांव के लोग बुखार से पीडि़त हैं इस बात से स्वास्थ्य विभाग की मिशन इंद्रधनुष टीम वाकिफ थी, क्योंकि गांव में मौत का क्रम शुरू होने के ठीक एक दिन पहले यह टीम टीकाकरण के लिए गांव पहुंची थी। इंद्रधनुष टीम ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और लोगों के बुखार से पीडि़त होने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों को नहीं दी। यदि यह टीम जिला मुख्यालय में लोगों के बीमार होने की जानकारी समय पर पहुंचा देती तो उन मरीजों का जीवन सुरक्षित हो सकता था जिनकी बीमारी की वजह से मौत हुई।

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