1928 की पहली प्रतिमा से शुरू हुआ दशहरा चल समारोह

1928 की पहली प्रतिमा से शुरू हुआ दशहरा चल समारोह

Samved Jain | Updated: 09 Oct 2019, 06:58:41 PM (IST) Damoh, Damoh, Madhya Pradesh, India

दमोह: 1928 की पहली प्रतिमा से शुरू हुआ दशहरा चल समारोह,कलेक्टर, एसपी व विधायक ने की आरती

दमोह. शहर में दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के बाद चल समारोह का पुराना इतिहास है। 1928 में आजादी के दीवानों ने दुर्गा प्रतिमा को गल्ला मंडी में स्थापित किया था। जिससे दशहरा चल समारोह की पहली प्रतिमा यही घंटाघर पर आती है। परंपरानुसार शाम 7 बजे घंटाघर पहुंची प्रतिमा की आरती कलेक्टर तरुण राठी, एसपी विवेक सिंह व दमोह विधायक राहुल सिंह ने आरती की। आरती के बाद प्राचीन प्रतिमा के साथ चल रहे अखाड़े के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। इसके साथ ही शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में दशहरा चल समारोह की शुरुआत हुई, जो देर रात तक जारी रहा।

घंटाघर पर मुख्य चल समारोह के दौरान एक-एक दुर्गा समिति को 15 मिनट का समय दिया जा रहा था। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों, सदस्यों को शील्ड व मेडल से सम्मानित किया जा रहा था। जिसके बाद अपना नंबर आने पर वह अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। इस बार चल समारोह में महिलाओं की भागीदारी व अखाड़ों के अस्त्र-शस्त्र परंपरानुसार चल रहे थे। शहर का ऐतिहासिक दशहरा चल समारोह देखने के लिए भारी जनसैलाब रहा। दशहरा चल समारोह घंटाघर से आगे बढ़ते हुए पुराना थाना, गौरीशंकर तिराहा होते हुए फुटेरा तालाब पहुंचा जहां सुरक्षा चक्र में प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया।


चप्पे-चप्पे पर मौजूद रही पुलिस -
शहर में अलग-अलग चौराहों पर पुलिस की ड्यूटी लगाई गई थी। जिसमें 250 जवानों की ड्यूटी करीब ४० से अधिक पाइंट पर लगाई गई थी। घंटाघर को चारों ओर से बैरीकेटस से कवर्ड किया गया था। इसके अलावा पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चाक चौबंद थी।
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6प्रतिमाएं नाव से शेष का विसर्जन क्रेन से
हटा. सुनार नदी में सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने क्रेन की व्यवस्था की थी, लेकिन क्रेन द्वारा शाम 7 बजे के बाद ही प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू किया गया। इसके पहले 6 प्रतिमाओं का विसर्जन नाव के माध्यम से किया गया। अखाड़ों के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। एक प्रतिमा विसर्जन में 30 मिनट का समय लगा।

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20 साल से शरबत पिला रहा मुस्लिम
नरसिंहगढ़. पिछले 20 सालों से मोहम्मद नफीस उर्फ गुड्डा कबाड़ी मां दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान चल समारोह में शामिल लोगों को शरबत पिलाते आ रहे हैं साथ दुर्गा प्रतिमा की समितियों में शामिल सदस्यों को माला पहनाई। इसके साथ ही वर्कर कॉलोनी व अन्य जगह प्रतिमाओं का विसर्जन सुनार नदी में किया गया।

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चल समारोह देखने उमड़े भक्त
तेंदूखेड़ा. शाम को शुरु हुआ चल समारोह देर रात तक जारी रहा। अखाड़े आतिशबाजी, डीजे बैंड व धुन पर नगर में विराजी 22 स्थानों की दुर्गा प्रतिमाएं निकाली गईं। मंगलवार को निकले चल समारोह के दौरान नगर की देवी प्रतिमाओं का विसर्जन 4 बजे से गुरैया नदी व नरगुवां तालाब में विधि विधान के साथ किया गया।

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बांदकपुर में हुआ विसर्जन
बांदकपुर. सिद्ध क्षेत्र जागेश्वरधाम में ग्राम की 8 प्रतिमाओं का विसर्जन दुर्गा तालाब में किया गया। इस दौरान तालाब पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात रही। ग्राम की सभी प्रतिमा ग्राम की प्रमुख चौराहों से होती हुईं तालाब तक पहुंची। जिसमें जनप्रतिनिधि, पुलिस व गांव के गणमान्य नागरिकों की भागीदारी रही।

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धूमधाम से निकली प्रतिमाएं
पटेरा. जवारों के साथ ही चार दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। इसके बाद तीन अन्य दुर्गा प्रतिमाओं का चल समारोह दशहरा पर हुआ। गाजे बाजे के साथ शस्त्र प्रदर्शन करते हुए दुर्गा प्रतिमाएं बस स्टैंड चौराहा पहुंची जहां। अखाड़ों के कलाकारों द्वारा करतब दिखाए गए। बड़ी संख्या में दर्शकों ने भी इनका उत्साहवर्धन किया।

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खड़ेरी बाजार में बिखरी रौनक
खड़ेरी. चल समारोह के दौरान मुख्य समारोह खड़ेरी बाजार में हुआ। जहां बैंडबाजा की धुन पर थिरकते हुए दुर्गा प्रतिमाएं लेकर भक्त पहुंचे। खड़ेरी के अलावा आलमपुर गांव की 9 प्रतिमाओं का विसर्जन भी उत्साह के साथ किया गया। तालाब पर विशेष इंतजाम किए गए थे, जहां सभी प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।

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9 प्रतिमाओं का विसर्जन पूर्णिमा को
तेजगढ़. पतलौनी गांव आस्था के लिए अलग माना जाता है यहां एक साथ एक मंच पर 9 प्रतिमाओं का पूजन अर्चन किया गया। जिसमें पं. ठाकुर प्रसाद दुबे, राजू प्रसाद दुबे शास्त्री व वीरेंद्र दुबे द्वारा पूजा अर्चना की गई। यहां नाटक की प्रस्तुति हुई। यह प्रतिमा पूर्णिमा को विसर्जित होंगी।

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बनवार अंचल में रही धूम
बनवार. बनवार चौबीसा में भी दशहरा चल समारोह की धूम रही। यहां पर अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन पूर्णिमा को किया जाता है, जिससे लगातार आगामी 5 दिनों तक भी उत्साह बना रहेगा। दशहरा चल समारोह पर विसर्जन के दौरान महिलाएं भी शामिल रहीं। परंपरा अनुसार अखाड़ों के कलाकारों ने भी प्रस्तुतियां दीं।

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