scriptDisillusionment with private schools turning to government schools | निजी विद्यालयों से हो रहा मोह भंग सरकारी स्कूलों की ओर रुख | Patrika News

निजी विद्यालयों से हो रहा मोह भंग सरकारी स्कूलों की ओर रुख

एक्सीलेंस व मॉडल स्कूल प्रवेश की 720 सीटों के लिए पहुंचे 2420

दमोह

Published: April 03, 2022 07:49:46 pm

दमोह. कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान सरकारी स्कूल जो हर साल शत प्रतिशत परिणाम ला रहे हैं अब ऐसे स्कूलों की ओर लोगों का रुझान बढ़ गया है, निजी स्कूलों की लूट-खसोट व पढ़ाई का स्तर गिरने से अब लोग अपने बच्चों को सीबीएसइ पैटर्न से हटाकर एमपी बोर्ड पैटर्न की ओर आकर्षित होने लगे हैं। यह रुझान रविवार को एक्सीलेंस व दो मॉडल स्कूलों की प्रवेश परीक्षा के दौरान ही सामने आया है।
दमोह जिले में 11 सेंटरों पर एक्सीलेंस दमोह, हटा मॉडल स्कूल व बटियागढ़ मॉडल स्कूल के लिए परीक्षा आयोजित की गई, तीनों विद्यालयों में 240-240 सीटें कक्षा 9वीं के लिए निर्धारित की गईं थीं। कुल 720 सीटों के लिए दमोह शहर के 5 सेंटरों में एमएलबी स्कूल, जेपीबी स्कूल, मॉडल स्कूल, एक्सीलेंस स्कूल व उर्दू स्कूलों के अलावा 6 ब्लॉकों के एक्सीलेंस स्कूल में परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए 2621 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 2420 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे। 201 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे हैं। इन परीक्षार्थियों में सबसे ज्यादा परीक्षार्थी निजी स्कूलों सीबीएसइ पैटर्न के विद्यार्थी भी शामिल हुए।
नाम बड़े दर्शन छोटे की तर्ज पर चल रहे
दमोह शहर में संचालित हो रहे सीबीएसइ पैटर्न के स्कूल अब नाम बड़े दर्शन छोटे की तर्ज पर चल रहे हैं। शहर के किसी भी निजी स्कूल द्वारा एनसीआरटी की पुस्तकें न चलाते हुए दिल्ली के राइटरों की कमीशन पर किताबें बुलाई जाती हैं, जो छोटी से छोटी क्लास की 5 हजार रुपए तक पड़ती है। इसके अलावा तीन से चार किस्तों में मोटी रकम फीस के रूप में जमा कराई जाती है। स्कूलों में पढ़ाई न कराते हुए ट्यूशन का जोर डाला जाता है, जिससे प्रत्येक अभिभावक पर ट्यूशन फीस का साल भर में 15 से 20 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्च आता है। छोटी से छोटी क्लास के बच्चे को निजी स्कूल में पढ़ाने पर 75 हजार से डेढ़ लाख रुपए का खर्च अभिभावक कर रहे हैं और पढ़ाई में ठिकाना नहीं है। जिससे जिन बच्चों के 65 से कम प्रतिशत आ रहे हैं, वह अभिभावक अपने बच्चों को एक्सीलेंस व मॉडल स्कूलों में प्रवेश दिलाने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि उनको भरोसा होता है कि उनके बच्चे एक्सीलेंस व मॉडल स्कूल की प्रवेश परीक्षा में चयनित हो जाएंगे। जिससे कोरोना काल के बाद निजी स्कूलों से विद्यार्थियों का पलायन सरकारी स्कूलों की ओर हो रहा है, जिससे एक्सीलेंस व मॉडल स्कूल की प्रवेश परीक्षाओं में उपलब्ध सीटों से तीन गुना विद्यार्थी प्रवेश पाने के लिए कतार में नजर आ रहे हैं।
केंद्रीय विद्यालय व जवाहर नवोदय विद्यालय
शहर के नामी गिरामी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन केंद्रीय विद्यालय दमोह व जवाहर नवोदय विद्यालय में कराने के लिए प्रयास करते हैं। सेंट्रल स्कूल में चयन के लिए सांसद कोटा व कलेक्टर कोटा के लिए लाख जतन करते हैं, क्योंकि ये अभिभावक निजी विद्यार्थियों की मनमर्जियों से परेशान होकर केंद्रीय विद्यालय व नवोदय विद्यालय की ओर फोकस करने लगते हैं।
11वीं से एमपी बोर्ड का रुख
नर्सरी से 10वीं तक निजी स्कूलों में सीबीएसइ पैटर्न से पढऩे वाले विद्यार्थी कक्षा 10वीं के बाद एमपी बोर्ड के स्कूलों में दाखिला लेकर 2 साल पढ़ाई करते हैं और मैरिट लिस्ट में नाम दर्ज कराकर बाहर पढऩे चले जाते हैं। जिससे निजी स्कूलों में 10वीं के बाद विद्यार्थी कम होने लगते हैं।
सीएम राइज स्कूलों से बढ़ेगा क्रेज
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को ध्यान आकर्षित कराने के लिए एक्सीलेंस, मॉडल के बाद अब राज्य के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने वाले संसाधन युक्त स्कूलों के निर्माण की सुविधा के लिए मप्र शिक्षा विभाग द्वारा सीएम उदय योजना शुरू की गई है, जिसके तहत सीएम राइज स्कूलों में केजी से लेकर 10वीं, 12वीं तक के छात्रों को एडमिशन दिया जाएगा और इन कक्षाओं को एकीकृत तरीके से विकसित किया जाएगा। जिससे केजी से निजी स्कूलों का रुख करने वाले अभिभावक अब अपने बच्चों को सीएम राइज स्कूलों में दाखिला दिलाकर निजी स्कूलों की लूट-खसोट से बचने का प्रयास करेंगे।
Disillusionment with private schools turning to government schools
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