दो बार से महिला विधायक अस्पताल में नहीं ला पाईं महिला डॉक्टर

सिविल अस्पताल का दर्जा विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, रेफर अस्पताल के नाम से है प्रचलित

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 07 Jun 2018, 02:03 PM IST

हटा. हटा विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो बार से विधायक उमादेवी खटीक हैं। महिला विधायक होने के बाद भी सिविल अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती पिछले साढ़े 9 साल में नहीं कर पाई हैं। इसके अलावा कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। यह अस्पताल केवल दमोह रेफर करने के लिए विख्यात होता जा रहा है।
हटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन नगरीय व ग्रामीण कुल मिलाकर दो लाख की आबादी के लिए यह अस्पताल इलाज की सुविधाएं मुहैया कराने में अक्षम साबित हो रहा है। प्रतिदिन 10 से लेकर 20 प्रसव आते हैं। जिनमें अधिकांश दमोह रेफर कर दिए जाते हैं। इसके साथ ही मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे दमोह रेफर कर दिया जाता है। यहां केवल सामान्य ओपीडी में इलाज मिलता है।
इस अस्पताल में ईसीजी मशीन, पल्स मॉनीटर मशीन, डेल्टा इलेक्ट्रानिक मशीन, एनस्थिसिया मशीन के अलावा आध्ुानिक ओटी टेबल सालों से कागज व पॉलीथिन से लिपटी रखी हंै। लाखों की मशीन एवं दवा उपलब्ध है। एनबीएसयू में दो वेंटिलेटर है, जिनमें एक चालू व एक बंद है।
ब्लाक एससी सेल कांग्रेस अध्यक्ष जयवर्धन कश्यप का कहना है कि यह बड़ी विडंवना है कि हटा की महिला विधायक हैं, लेकिन प्रसव के दौरान यहां महिला चिकित्सक न होने से सबसे ज्यादा मौतें जच्चा व बच्चा की होती है। पिछले साढ़े 9 साल में कई जानें गई हैं। अगर एमडी, गायनिक व सर्जन डॉक्टर पदस्थ होता तो जानें बच सकती थीं। पवन ठाकुर, वेद पटैल ने बताया कि 60 बिस्तर वाले अस्पताल में मात्र 30 बिस्तर की सुविधा उपलब्ध है। इनमें से 10 पलंग प्रसूताओं के लिए रिजर्व रखे जाते हैं। जिससे सिविल अस्पताल महज 20 बिस्तरों से ही चल रहा है।
महिलाओं को दमोह, जबलपुर जाना पड़ता है
समाज सेवी पार्वती, गेंदारानी, मुन्नीबाई ने बताया कि महिला संबंधी रोगों की विशेषज्ञ महिला डॉक्टर हटा में न होने पर छोटी सी समस्या के लिए भी यहां की महिलाओं को दमोह या जबलपुर तक जाने विवश होना पड़ता है। क्षेत्र में विशेषकर आदिवासी बाहुल्य गांवों में ऐसी भी महिलाएं हैं, जिनकी बच्चादानी का ऑपरेशन बहुत जरूरी हैं, लेकिन धन के अभाव के कारण ये महिलाएं छोटे-छोटे रोगों को बड़े बड़े रोगों में बदलकर मौत को गले लगा रही हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं
सिविल अस्पताल में कम से कम एमडी, डीसीएच, महिला रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नाक कान गला रोग विशेषज्ञ होना चाहिए। इन डॉक्टर्स के अभाव में मरीज को जिला अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है।
वर्जन
पूर्व में जब मंै यहां पर पदस्थ था, उस समय से लेकर वर्तमान कार्यकाल तक डॉक्टर्स की कमी की पूर्ति करने शासन को पत्र लिख चुका हूं। हाल ही में इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया है। अस्पताल में डॉक्टर्स की व्यवस्था करना शासन स्तर का काम है।
डॉ. पीडी करगैंया, बीएमओ सिविल अस्पताल हटा।

Rajesh Kumar Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned