जिले में पहली बार देखी वन विभाग की ऐसी कार्रवाई, देखने वाले रह गए दंग

जिले में पहली बार देखी वन विभाग की ऐसी कार्रवाई, देखने वाले रह गए दंग

Puspendra Tiwari | Publish: Aug, 12 2018 03:32:01 PM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

सामूहिक गिरफ्तारी के बाद एमएलसी कराकर किया न्यायालय में पेश

दमोह/तेंदूखेड़ा. जिले के नौरादेही अभयारण्य के अंतर्गत आने गांव तरा के 17 परिवारों को मुआवजा राशि नहीं मिली है, जिसकी वजह से वह विस्थापन किए जाने के बाद भी गांव छोडऩे को तैयार नहीं हैं। इधर अभयारण्य में बढ़ते दायरे के चलते वन विभाग को लोगों की मौजूदगी सिरदर्द बनी हुई है। इसी के चलते शनिवार को वन विभाग द्वारा आधे सैकड़ा लोगों की गिरफ्तारी की गई और उन्हें न्यायालय में पेश किया गया।
मामले में मिली जानकारी के अनुसार तार गांव में विस्थापित किए गए 64 परिवारों में से 17 आदिवासी परिवार के लोगो द्वारा पुन: तरा गांव में पहुंचकर अपना डेरा जमा लिया गया था। शुक्रवार को 12 बजे ऐसे परिवारों के लोगों को पकडऩे का कार्य वन विभाग द्वारा शुरू किया गया। लोगों को वाहनों में भरकर अभयारण्य में शुक्रवार-शनिवार की रात रखा गया और सुबह गिरफ्तार किए गए १७ पुरूष आरोपी, १७ महिला आरोपी व ३ बालिकाओं का मेडीकल परीक्षण कराकर न्यायालय में पेश किया गया।


रेंजर वीके श्रीवास्तव ने इस संबंध में बताया कि शासन द्वारा तरा गांव का विस्थापन पूर्व में किया गया था। विस्थापन की राशि भी परिवारों को दी गई है, उसके बावजूद ऐसे ही परिवारो ने पुन: आकर एक बार फिर से कब्जा कर लिया है, कोर्ट में पेश किया गया।


वन विभाग पर आरोप


17 आदिवासी परिवारो के लोगो की महिलाओं में शामिल लक्ष्मी, उमारानी, ग्यासी बाई, नीमा बाई, सुखराम, पंचम, अनतं, सिंह ने बताया कि सन् 2016-17 में तरा गांव का विस्थापन किया गया था। जो नौरादेही रेंज के अंतर्गत आता है। एक-एक परिवार को 5 लाख 57 हजार रुपए की राशि दी गई, साथ ही 17 परिवारों के लोगो को उक्त मुआवजा राशि से वंचित रहना पड़ा। उन्होंने वन विभाग पर आरोप लगाया कि सन् 2015-16 में लगरा कुसमी गांव का विस्थापन वन विभाग द्वारा किया गया था। वहां के परिवारों को 10-10 लाख मुआवजा राशि दी गई। इसी तरह ग्राम तिंदनी व ग्वारी गांव के विस्थापन लगभग 1 वर्ष पहले किया गया है। वहां के परिवारों को 8-8 लाख रुपए की राशि दी गई है। वन विभाग के अधिकारियों ने हम लोगों केसाथ काफी भेदभाव किया है, जिसके कारण हमे अपने परिवार को चलाने में परेशानी आ रही है। इसलिए हम लोग वापिस अपने तरा गांव पहॅुचे। उन्होंने बताया कि 17 परिवारों में 9 बालक बालिका शादीशुदा हैं जिन्हें मुआवजा राशि नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि विस्थापन के पहले वन विभाग के अधिकारियों द्वारा समस्त सुविधाएं देने की बात कही गई, उन्होने कहा था कि लोगों को राशि के साथ जमीन, सड़क, पानी बिजली सब मुहैया करा दी जाएगी जो आज तक नही दी गई है।


कई दे चुके आवेदन


नौरादेही अभयारण्य से विस्थापित किए गए लोगों ने बताया कि इसके पूर्व वन अधिकारियों सहित सागर कलेक्ट्रर को कई आवेदन दिए गए थे। उसके बाद आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।


मारपीट का आरोप


महिला सदारानी ने का कहना है कि वन विभाग की महिला वन रक्षक द्वारा उसकी गर्दन दी गई थी व वन रक्षक द्वारा उसका हाथ तोडऩे का प्रयास किया गया। महिला के हाथ में चोट भी साफतौर से दिखाई दे रही थी। वहीं अन्य लोगों के द्वारा भी वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया।


34 लोगों की हुई एमएलसी


आरोपियों में शामिल दयाराम रात पिता तातू 59, गेदालाल पिता बिहारी 65, अमन सिंह पिता कल्यान सिंह 54, गिरधारीपिता पोलू 60, जयश्री पति कोदूलाल 26, संतोबाई पति सुखराम 35, अनीता पति नंदराम 32, अवधरानी पति नोनेलाल 45, प्रेमरानी पति दयाराम 60, श्यामरानी पति अनंत 34, रचना पति दीपचंद 32, संगीता पति हेमराज 22, नीमा बाई पति गुड्डा 36, प्रभाबाई पति मुकेश 30, शोभना पति दशरथ 27, राजेश्वरी पति चेतराम 30, सरोजरानी पति नन्हेभाई 50, ग्यारसी पति राधवेन्द्र 20, सरोज पति भगवानदास 32, लक्ष्मी पिता पंचम 19, उमारानी पति पंचम 45, पंचम पिता दयाराम 40, गुड्डा पिता मुकुन्दी 35, बृजनाथ पिता खिलान 45, राधवेन्द्र पिता हरिप्रसाद 35, चेतराज पिता दयाराम 40, दीपचंद पिता डालसींग 30, दामोदर पिता गिरधारी 21 वर्ष, पप्पू पिता कालू 20, पलन पिता मुनीम 25, शिवप्रसाद नन्हेभाई, रामप्रसाद पिता परम लाल 60, भूमि 58 वर्ष, शोभन पिता गोविंद 60, इन सभी लोगों की एमएलसी स्वास्थ्य केंद्र लाकर कराई गई।

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