वाहन दुर्घटना में चार की मौत, पुलिस जांच में जुटी

जिले की सड़कों पर लगातार हो रहीं वाहन दुर्घटनाएं

दमोह. जिले भर में वाहन दुर्घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को अलग-अलग वाहन दुर्घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई। एक मामले में पटेरा थाना के राजाबंदी गांव में बाइक सवार दो लोग अनियंत्रित होकर गिर गए। जिसमें दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। इसके अलावा तेजगढ़ थाना के सर्रा के पास एक बाइक चालक शिक्षक मवेशियों से टकरा गया था। जिसकी मौत हो गई। इसी तरह से देहात थाना के परसोरिया के समीप ट्रैक्टर से गिरने पर एक युवक की मौत हो गई। इस तरह से १५ घंटे के बीच चार लोगों की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई।
मामला नंबर एक -
पटेरा थाना के राजाबंदी गांव के पास विष्णु पिता हल्के विश्वकर्मा तथा प्रदीप पिता वृंदावन विश्वकर्मा निवासी पांड़ाझिर हटा बाइक से जाने के दौरान अनियंत्रित होकर सीधे पुल के पास से खेत में जा गिरे। जिससे दोनों को गंभीर चोटें आने पर मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने पहुंचकर शव पंचनामा कार्रवाई के बाद मामले को जांच में लिया है।
मामला नंबर दो -
जिले के देहात थानांतर्गत धनगौर गुंजी गांव निवासी भगवान सिंह पिता हल्कू सिंह लोधी (२६) ट्रैक्टर पर बैठकर जा रहा था। इसी बीच अचानक कुमेरिया परसोरिया के पास वह टै्रक्टर से नीचे जा गिरा। रात करीब ११ बजे हुई घटना के बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मामला नंबर तीन -
तेजगढ़ थानांतर्गत एक शिक्षक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने जाने के दौरान मवेशियों से टकरा गया। जिसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि निजी स्कूल में पदस्थ शिक्षक लकी पिता महेंद्र दीक्षित (२५) बाइक से सर्रा गांव जा रहे थे। जिनकी बाइक झलौन के पास राजघाट पुल से निकलने के दौरान वहां भैंस के झुंड अचानक सामने आ गए। जिससे वह बाइक से अनियंत्रित होकर पुल पर ही जा गिरे। जिन्हें गंभीर चोटें आने के बाद उनकी घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गए।
नहीं लगाए थे हैलमेट-
लगातार होने वाली बाइक दुर्घटनाओं में किसी भी वाहन चालक या उसके साथ बैठने वाले व्यक्ति ने हैलमेट का उपयोग नहीं किया था। अगर हैलमेट लगाया होता तो उनकी जान बच सकती थी। क्योंकि प्रत्येक हादसों में अधिकांशत: सिर में गंभीर चोटें आने, हैडइंजुरी की वजह ही मौत का कारण मानी जा रही है। डॉ. दिवाकर पटैल आरएमओ जिला अस्पताल का कहना है कि जिले में होने वाली वाहन दुर्घटनाओं में अभी तक सबसे अधिक मामले जो देखे गए हैं, उनमें हैडइंजुरी सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है। बाइक दुर्घटनाओं में अगर चालक व उसके साथ बैठने वाले अगर हैलमेट लगाया है तो उसे भले की कितनी गंभीर चोटें आईं हों, लेकिन उसमें से करीब ९५ फीसदी लोगों की जान बच जाती है। शेष की किन्हीं अन्य कारणों से मौत होती है।
बीते साल से हो गईं अधिक मौतें -

जिले में होने वाली वाहन दुर्घटनाओं में आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए तो बीते साल की अपेक्षा इस वर्ष वाहन दुर्घटना में अधिक मौतें हुईं हैं।
वर्ष २०१८ में १ जनवरी से ३१ अक्टूबर तक कुल ११७ लोगों की मौत हुई थी और ५३३ लोग घायल हुए थे।
इस वर्ष ३१ अक्टूबर तक १४२ लोगों की मौत तथा ४६८ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
कुल मिलाकर इस वर्ष के १० माह के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो हर मात १४ लोगों की मौत हो रही है। जबकि हर माह ४८ लोग गंभीररूप से घायल हो रहे हैं।
लोगों को जागरुक होना जरूरी है-
जिले में वाहन दुर्घटनाएं जो हो रही हैं, उसमें जरा सी लापरवाही लोगों को जानलेवा बन जाती है। सभी को यातायात के नियमों पर चलना होगा। जिससे वाहन दुर्घटनाओं में काफी कमी आएगी। जो लोग जागरुक होकर नियमों पर चलते हैं और यातायात का पालन कर सकते हैं ऐसे लोग बहुत की कम वाहन दुर्घटना का शिकार होते हैं।
विवेक कुमार लाल - एएसपी दमोह

कार्रवाई करने के साथ करते हैं जागरुक -
जिले में जागरुकता की काफी कमी देखने मिलती है। लोग यातायात के नियमों पर नहीं चलते। हालांकि इसको लेकर स्कूलों के साथ अन्य जागरुकता अभियान भी चलाया जाता है। चालानी कार्रवाई भी की जाती है।
अभिनव साहू-प्रभारी यातायात

lamikant tiwari
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