कोहरे के साथ हुई सुबह, दोपहर में निकली राहत की धूप,उपज समेटने में जुटे अन्नदाता

कोहरे के साथ हुई सुबह, दोपहर में निकली राहत की धूप,उपज समेटने में जुटे अन्नदाता

Rajesh Kumar Pandey | Publish: Feb, 15 2018 01:35:40 PM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

उपज समेटने में जुटे अन्नदाता, चिंता में अन्नदाता मेहनत पर फिर जाएं पानी

मडिय़ादो. तीन दिन पहले गरज के साथ हुई बारिश और लगातार खराब मौसम रहने के बाद बुधवार की सुबह कोहरे और बादलों के साथ हुई। लेकिन दोपहर तक बादल छंटने के बाद धूप खिलने से किसानों को राहत मिली है।
जिले के अनेक हिस्सों में ओला वृष्टि को देख मडिय़ादो क्षेत्र के किसान सहमें हुए हंै। किसानों को तीन साल पहले 7 मार्च 2016 का वह मंजर याद आता है, जब समूचे क्षेत्र में ओला वृष्टि से अन्नदाता की मेहनत पर पानी फिरने से वह लाचार हो गया था। अभी गनीमत रही की क्षेत्र में कही कोई नुकसान की खबर नहीं है।
मिला जुला असर
दलहनी फसलों में चना, मटर, मसूर, तिलहन व अरहर की फसल पक कर तैयार है। किसानों के द्वारा फसलों की कटाई कराने का काम तेजी से चल रहा है। कहीं-कहीं फसलें काट कर खलिहान में रखी हुई है। दो दिन पहले हुई बारिश से फसलें भींग गईं थीं। नमी आने के कारण किसान फसलों को सुखाने धूप का इंतजार कर रहे थे।
किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल गहोट पर है। बालियों में दाना बन रहा है, सूखे के कारण फसलें कमजोर दिखाई दे रही हैं। इस बारिश से गेहूं की फसल को जीवनदान मिला है।
चेतुआ मजदूरों की बल्ले-बल्ले
खराब मौसम और बीते वर्ष ओला वृष्टि से हुए नुकसान से डरा किसान इस समय मुंह मांगी कीमत देकर चेत फसल कटाई करने वाले मजदूरों को गांव से दस से बीस किमी तक हर दिन ट्रैक्टर-ट्रालियों से ले जाकर मुंह मांगी कीमत देकर फसलों की कटाई करा रहा है। किसानों का कहना है कि जितनी जल्दी हो सके। वह पकी फसल को काटने के साथ थ्रेसिंग करा कर उपज को सहेजना चाहता है। क्षेत्र के बछामा, मदनपुरा, उदयपुरा, कलकुआ, पाटन, घूरखेड़ा, घोघरा, मजरा, कारीबरा, जुनेरी व मडिय़ादो से हर दिन सैकड़ों मजदूर सुुबह से ट्रैक्टर-ट्रालियों पर बैठे अपने गांव से दूसरे गांवों खेतों में कटाई करने जाते देखे जा सकते हंै। इन दिनों वनांचल क्षेत्र में घरों में ताले व गांव में सन्नाटा पसरा देखा जा सकता है। मजदूर रतिराम, हरपू, परमू, सबीता बाई, रामबाई का कहना है कि चैत्र कटाई का मजदूरों के लिए अच्छा सीजन होता है। दो सौ से ढाई सौ रुपए दिन से मजदूरी मिल रही है। इसके अलावा खेतों में कटाई के साथ कुछ फलियां व दाने गिर जाते हैं उसे भी बीन कर एकत्रित कर लेते हंै, जिसमें भी कमाई हो जाती है।

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