निजी कॉलोनियों में रकम फंसाना पड़ सकता हैं महंगा, खरीदने के पहले यह जानना जरूरी

शहर में डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियां निर्माणाधीन, लेकिन अधिकांश अवैध

By: नितिन सदाफल

Published: 04 Jan 2018, 11:22 AM IST

पुष्पेंद्र तिवारी दमोह. शहर में इन दिनों करीब डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन इनमें आधा दर्जन भी कॉलोनियां ऐसी नहीं हैं जो अपनी वैधता के मानकों को पूरा करतीं हों। कॉलोनाइजर व रियल एस्टेट में शामिल कारोबारी भरपूर कमाई करने में लगे हैं, लेकिन लाखों रुपए देकर मकान खरीदने वाले लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं। ऐसा होना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि कॉलोनी में मकान खरीदने की उत्सुकता व जल्दबाजी में खरीददार यह जानकारी नहीं जुटाते कि कॉलोनी सरकारी मानकों को पूरा करती है या नहीं। पत्रिका ने जब इस मामले की पड़ताल की तो चौकाने वाले सच सामने आए हैं। मकान प्लाट खरीदने वाले की रकम से कॉलोनाइजर खूब लाभ बंटोर रहे हैं और सरकारी टैक्स की चोरी कर रहे हैं।

वैधता पूरी नहीं की गई

शहर के अलावा तहसील मुख्यालयों में कॉलोनियों का निर्माण कार्य जारी है, लेकिन जिले की महज तीन से चार कॉलोनियां ही ऐसीं हैं जो वैधता के सभी मानकों को पूरा करतीं हैं, बकाया सभी कॉलोनियों को सरकारी मानकों को पूरा नहीं करने के बाद भी निर्माण किया जा रहा है और प्लाट व मकानों की खरीद फरोक्त की जा रही है। खासबात यह है कि कॉलोनियों का निर्माण कार्य विभिन्न सरकारी कार्यालयों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किए बगैर ही बनाया जा रहा है।

जांच नहीं होने से फलफूल रहा कारोबार

कॉलोनियों का निर्माण कार्य वैधानिक प्रावधानों को पूरा किए बगैर तैयार किया जा रहा है व कॉलोनी के नाम पर करोड़ों रुपए के मकान प्लाट बेंचने का कारोबार हो रहा है, इस बात को लेकर प्रशासनिक अमले द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यही वजह है कि कॉलोनी के नाम पर खरीददारों के साथ ठगी का सिलसिला जारी है।

नहीं है रेरा पंजीयन

कॉलोनी में मकान खरीदने वालों की सुरक्षा के लिए रेरा एक्ट सरकार द्वारा लागू किया गया है, रेरा का पंजीयन मिलने के बाद ही कॉलोनाइजर प्लाट व मकानों की खरीद फरोक्त कर सकते हैं। जिले में निर्माणाधीन कॉलोनियों में महज तीन कॉलोनी ही ऐसी हैं जिनके पास रेरा का पंजीयन है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार रेरा एक्ट के लागू होने के बाद किसी भी आवासीय कॉलोनी, प्रोजेक्ट की तब तक मार्केटिंग और बुकिंग नहीं की जा सकती जब तक कि उसका रेरा में पंजीयन न हो जाए। इस एक्ट में यह बात भी शामिल हैं कि खरीददार को मकान या प्लाट लेने से पहले कॉलोनी का रेरा पंजीयन है कि नहीं इस बात की तहकीकात कर लेनी चाहिए क्योंकि रेरा का पंजीयन नहीं होने की दिशा में खरीददार के हित सुरक्षित नहीं हैं। कॉलोनी सरकारी मानकों में अवैध मानी जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में निर्माणाधीन कॉलोनियों में शामिल कृष्णा हेग्टिज, श्याम नगर, श्रीराम कुंज, सिद्धीविनायक ने ही रेरा का पंजीयन प्राप्त किया है। जबकि शहर की अन्य चर्चित बड़ी कॉलोनियों ने अब तक यह पंजीयन प्राप्त नहीं किया है साथ ही कुछ ऐसी कॉलोनी भी हैं जिन्होंने आवेदन किया ेलेकिन मानकों के पूरा नहीं होने पर उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं।

इन मानकों को पूरा करना आवश्यक

किसी भी कॉलोनी के निर्माण से पहले कॉलोनाइजर को इन कानूनी प्रावधानों को पूरा करना आवश्यक होता है। इनमें शामिल कॉलोनाइजिंग लाइसेंस प्राप्त करना, संबंधित ग्राम पंचायत की एनओसी, टाउन कंट्री प्लानिंग से अनुमति, भूमि का डायवर्सन, विकास अनुमति, जीएसटी नंबर व टैक्स भुगतान, प्लाट मार्टग्रेज (रिजस्टर्ड) इडब्लूएस एंड एलआईजी प्लानिंग, आश्रय शुल्क का भुगतान, अतिरिक्त आश्रय शुल्क का भुगतान, रेरा पंजीयन, नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र व बिजली कंपनी की स्वीकृति होना है। इन मानकों में किसी भी एक मानक के पूरा नहीं होने पर कॉलोनी को वैधता की परिधि में शामिल नहीं किया जाता है।

कानूनी प्रावधानों को पूरा करना प्रत्येक कॉलोनाइजर को आवश्यक है, यदि मानकों को पूरा नहीं किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी, जो विषय संज्ञान में आया है इसकी त्वरित जांच शुरु की जाएगी।
सीपी पटेल, एसडीएम दमोह

 

नितिन सदाफल
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