प्लॉट की रजिस्ट्री करने में हाउसिंग बोर्ड की मनमानी

नहीं दिया कब्जा अब प्रभावितों से मांग रहे भू-भाटक राशि

By: Sanket Shrivastava

Published: 07 Jan 2019, 10:10 AM IST

 

दमोह. जिले के सरकारी कर्मचारियों को शासन द्वारा एक योजना के तहत आवासीय प्लॉट वर्षों पहले नीलामी प्रक्रिया के तहत दिए गए थे, लेकिन प्लाट की राशि जमा किए जाने के दौरान प्लॉट का कब्जा नहीं दिया गया था। कर्मचारियों द्वारा बताया गया है कि राशि जमा होने के करीब तीन वर्ष बाद भी प्लॉट मुहैया नहीं कराए गए हैं और अब तक प्लॉटों की रजिस्ट्री भी नहीं हो सकी है। मामले की खास बात यह है कि कर्मचारियों को प्लॉट दिए जाने की यह योजना वर्षों पहले शुरू हुई थी और शुरुआती रकम भी कर्मचारियों द्वारा जमा कर दी गई थी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने रकम लेने के बाद एकाएक मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था और वर्षों तक कर्मचारी परेशान होते रहे। कर्मचारियों के द्वारा जब वृहद आंदोलन की चेतावनी दी, तो हरकत में आए हाउसिंग बोर्ड द्वारा कर्मचारियों के लिए जिस भूमि पर प्लॉट दिए जाने है उसका डवलपमेंट शुरू किया था। इस कार्य को शुरु हुए दो वर्ष बीत चुके हैं और डवलपमेंट का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी कर्मचारियों को उनके लिए आवंटित किए गए प्लाटों का कब्जा नहीं मिला है।
लिहाजा सैकड़ों कर्मचारियों से करोड़ों की राशि लेने के बाद भी अब तक कर्मचारियों को उनके मकान बनाने के लिए भूखंड उपलब्ध नहीं कराया गया है।
मामले में मिली जानकारी के अनुसार हाउसिंग बोर्ड द्वारा इस मामले की शुरुआत दिसंबर २००३ में सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर की थी। कुल १६८ प्लाट अलग अलग दरों पर कर्मचारियों को दस्तावेजी तौर पर दिए गए थे।
योजना का लाभ लेने वाले ४१२ कर्मचारियों द्वारा शुरुआती करीब एक करोड़ की रकम बैंक के मार्फत मप्र गृह निर्माण मंडल के खाते में जमा की थी। वहीं मार्च २०१६ में ९ करोड़ राशि ब्याज सहित जमा की गई थी। २००३ में प्लॉट आवंटन की शुरुआत होकर करीब एक दसक से अधिक समय तक ठंडे बस्ते का शिकार रही। वर्षों बीत जाने के बाद जब कर्मचारियों ने हल्ला बोला तो हाऊसिंग बोर्ड द्वारा भूखंड पर आवास बनने से पहले दी जाने वाली कॉलोनी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए डवलपमेंट शुरू कर दिया था जो पूरा होने को भी एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन कर्मचारियों को अभी तक प्लॉटों की रजिस्ट्री नहीं की गई है।
मामले में कर्मचारी संघ अध्यक्ष राकेश हजारी ने पत्रिका को बताया है कि हाऊसिंग बोर्ड द्वारा प्रभावित कर्मचारियों से भू भाटक की राशि जमा करने के लिए कहा गया है। लेकिन कर्मचारियों का कहना यह है कि भू भाटक की राशि रजिस्ट्री कराए जाने के बाद जमा कर दी जाएगी। राकेश हजारी ने बताया है कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा कर्मचारियों को एक वर्ष पहले लोकेशन के आधार पर प्लॉटों का आवंटन किया गया है, लेकिन इन प्लाटों की रजिस्ट्री अभी तक नहीं की गई है, जबकि रजिस्ट्री का कार्य वर्षों पहले हो जाना चाहिए था, क्योंकि कर्मचारियों द्वारा प्लॉट की वह राशि जमा कर दी गई थी, जो शासन द्वारा निर्धारित थी।
हाउसिंग बोर्ड की योजना में प्रभावित कर्मचारी परेशान होने के साथ साथ खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। ऐसा होना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि कर्मचारियों ने वर्षों की नौकरी की कमाई हाऊसिंग बोर्ड को प्लाट के लिए दे दी थी। लेकिन प्लॉट उपलब्ध नहीं होने के कारण समय पर मकान तैयार नहीं हो सके। इधर समय के साथ साथ भवन निर्माण सामग्री व लेबर चार्ज कई गुना बढ़ गया है। कर्मचारियों का मानना है कि उन्हें होने वाला नुकसान हाऊसिंग बोर्ड की लालफीताशाही का परिणाम है और अभी भी हाउसिंग बोर्ड कर्मचारियों को परेशान करने की राह पर ही है।

Sanket Shrivastava
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned