गूगल सर्च इंजन से गायब हुई मेघ गार्डन की पहचान

राजनगर जलाशय से सटकर बना सरकारी पार्क

Puspendra Tiwari

September, 1312:15 PM

Damoh, Madhya Pradesh, India

दमोह. शहर की प्यास बुझाने वाले राजनगर जलाशय से सटकर बना सरकारी पार्क जिसे दस्तावेजी कारस्थानी कर मेघ गार्डन का नाम दे दिया गया था। गूगल अर्थ या गूगल मेप पर जैसे ही कोई राजनगर जलाशय सर्च करता तो सबसे पहले यहां की प्रमुख पहचान के रूप में मेघ गार्डन लिखा सामने आता था। पत्रिका द्वारा 31 जुलाई को प्रकाशित खबर में जब इस तथ्य का खुलासा किया गया कि राजनगर जलाशय के प्रभारी मेघ तिवारी द्वारा यहां के सरकारी गार्डन को अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए मेघ गार्डन का नाम दिया गया है तो लोग इस खुलासे से अचरज में पड़ गए थे। वहीं मामला उजागर होने के बाद राजनैतिक लोगों के द्वारा भी आपत्ति उठाई जाने लगी थी और सब इंजीनियर मेघ तिवारी से जबाव सवाल लोगों के शुरू हो गए थे। आखिरकार किसी प्रकार की कार्रवाई का शिकार ना बनना पड़ जाए इस मंशा को ध्यान में रखते हुए गूगल से मेघ गार्डन की पहचान गायब कर दी गई है। वर्तमान में देखा जा सकता है कि गूगल मेप या गूगल अर्थ पर राजनगर जलाशय सर्च करने पर मेघ गार्डन की पहचान ओपन नहीं होती है।


नहीं ली गई थी परिषद से स्वीकृति


पत्रिका द्वारा जब इस मामले की सघन पड़ताल की गई तो यह बात सामने आई थी कि नगर पालिका के क्षेत्राधिकार में शामिल सरकारी गार्डन का नाम मेघ गार्डन रखा जाए इसकी अनुमति अथवा इससे संबंधित प्रस्ताव को किसी प्रकार की स्वीकृति नपा परिषद द्वारा नहीं दी गई थी। वहीं जिला प्रशासन से भी नामांकरण को लेकर अनुमित जारी नहीं हुई थी। यही वजह है कि जब मामला सार्वजनिक हो गया तो मेघ गार्डन की पहचान हमेशा के लिए गायब करना मजबूरी बन गई।


यहां सुधारक नहीं दे पाया ध्यान


नाम गायब कर दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद बुधवार को जब पत्रिका द्वारा मामले में इंटरनेट पर पड़ताल की गई तो सामने यह आया है कि सुधारक ने गूगल मेप व गगूल अर्थ से तो मेघ गार्डन की पहचान मिटा दी, लेकिन अन्य बेवसाइट से जानकारी नहीं मिटाई जा सकी। यदि कोई गूगल सर्च इंजन पर शहर के पार्कों की सूची खोलता है तो उस सूची में अवश्य अभी भी मेघ गार्डन का नाम लिखा आ रहा है।


वर्जन


पार्क का नाम रखे जाने और स्वयं के नाम से सरकारी पार्क की पहचान किए जाने को लेकर आपत्ति उठाई गई थी। मुझे अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि अब इंटरनेट पर पूर्व की तरह पार्क की पहचान होना बंद हो गई है।
मालती असाटी, नपाध्यक्ष

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