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दमोह के किल्लाईचौराहा से निकल रहे हैं, तो रहें सतर्क, खबर में जाने वजह

अलग अलग शहरों से दमोह में बस स्टैंड तक आने और जाने के लिए प्रशासन ने बसों के लिए नए रूट तय किए थे। इसके पीछे यातायात दबाव कम करने और हादसों पर अंकुश लगाने का मकसद था।

दमोहJul 10, 2024 / 11:20 am

pushpendra tiwari

दमोह. अलग अलग शहरों से दमोह में बस स्टैंड तक आने और जाने के लिए प्रशासन ने बसों के लिए नए रूट तय किए थे। इसके पीछे यातायात दबाव कम करने और हादसों पर अंकुश लगाने का मकसद था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इसकी कुछ समय बाद समीक्षा भी होनी थीए लेकिन दो महीने बीतने के बावजूद प्रशासन ने समीक्षा नहीं की। जबकि नए रूट में कुछ मार्गों पर यातायात दवाब बढऩे से दिक्कतें बढ़ गई हैं। इससे लोग परेशान हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी किल्लाई चौराहा पर देखने को मिल रही है। नई व्यवस्था के तहत किल्लाई चौराहे से पिछले दो माह से सागर, जबलपुर, कटनी, हिंडोरिया, तेंदूखेड़ा आदि आने जाने वालीं बसों निकल रही हैं। चौराहे पर बसों का दबाव पहले से कहीं ज्यादा है।
खास बात ये है कि प्रशासन ने किल्लाई चौराहा से बसों के आवागमन को हरी झंडी तो दिखाई, लेकिन यहां पर सुरक्षा के इंतजामों पर ध्यान नहीं दिया। मौके पर सुरक्षा इंतजाम न होने के कारण हादसों की स्थिति निर्मित हो रही है। जबकि प्रशासन का नए रूट तय करने का मकसद ही हादसों का खतरा खत्म करना था। किल्लाई चौराहा शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में शामिल है। इस चौराहे से शहर की लगभग सभी पॉश कॉलोनियों के लोग आवागमन करते हैं। इसके अलावा मुख्य चौराहा होने की वजह से स्कूल कॉलेज के छात्रों का निकलना भी इसी चौराहे से निकलते हैं। किल्लाई चौराहे पर ही प्रमुख बैंक भी संचालित हैं। जहां सैकड़ों लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस सबके बीच बसों की धमाचौकड़ी परेशानी का सबब बन रही है। दबाव बढऩे से चौराहे पर हालात बेकाबू हो रहे हैं। वहीं प्रशासन ने अब तक नए रूट की समीक्षा नहीं की।
यदि समीक्षा होती है, तो किल्लाई चौराहे वाले रूट पर खामियां उजागर होंगी। ऐसे में यहां सुधार के प्रयास होने की संभावना बढ़ेगी या फिर इस रूट से बसों की आवाजाही को लेकर कोई नया निर्णय भी हो सकेगा। मामले में यातायात थाना प्रभारी दलबीर सिंह मार्को का कहना है कि यदि बस चालक चौराहे पर बसें खड़ी कर रहे हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।
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स्कूली वाहनों में यातायात नियमों को किया जा रहा नजर अंदाज
दमोह. शहर समेत जिले भर में स्कूली वाहनों का मनमर्जी से संचालन हो रहा है। वाहनों की फिटनेस के मापदंड नजरअंदाज किए जा रहे हैं। साथ में स्कूल वाहन चालक यातायात नियमों को भी ताक पर रख रहे हैं। इससे वाहनों मे सफर करने वाले स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इससे प्रशासन भी वाकिफ है, लेकिन प्रशासन निर्देश जारी करने तक सीमित है। जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में स्कूल वाहनों के संचालन में लगातार मनमानी हो रही है।
शहर में दर्जनों तिपहिया, चार पहिया और बसें स्कूली बच्चों को ढो रही हैं। इनमें अधिकांश वाहन ऐसे हैं, जिनमें स्कूली वाहनों को लेकर जो मापदंड तय किए गए हैं उनका लगातार उल्लंघन हो रहा है। इसके साथ ही वाहन चालक भी यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे। यही कहानी वाहन स्टाफ की है। स्कूल वाहनों में शिक्षित प्रशिक्षित परिचालक होना चाहिए, लेकिन शहर में संचालित कई स्कूल वाहनों में इसके उलट स्थिति है।
किसी भी स्कूल बस चालक को कम से कम 5 वर्ष तक भारी वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए, लेकिन शहर में इससे भी कम अनुभव के कई चालकों को स्कूल बसों की स्टेयरिंग सौंप दी। वहीं देखने में आ रहा है कि वाहन चालक ड्रेस कोड का पालन भी नहीं कर रहे हैं। ज्यादातर स्कूल वाहन चालक ऐसे हैंए जो कभी भी ड्रेस नहीं पहनते। सादा कपड़ों में रहने वाले स्कूल वाहन चालकों को लेकर हमेशा गफलत रहती है। स्कूल वाहनों में शिक्षित प्रशिक्षित परिचारिक होने का नियम भी है। यदि वाहन में छात्राएं हैं, तो परिचारिका होनी चाहिए, लेकिन शहर में संचालित स्कूल वाहनों में इसकी भी अनदेखी हो रही है।

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