वन परिक्षेत्र में पत्थरों का अवैध उत्खनन

5 खदानें बिरली-बिरली चलाकर पहुंचा रहे नुकसानी

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 01 Jul 2020, 06:06 AM IST

दमोह. वन परिक्षेत्र में चीफ व पटिया पत्थर उम्दा किस्म का पाया जाता है। वन परिक्षेत्र में उत्खनन पर रोक लगी है, इसके बावजूद जिले की वन खदानों पर चोरी छिपे-छिपे छोटी छोटी खदानें संचालित कर वन भूमि से पत्थरों का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
दमोह वन बीट भूरी बडय़ाऊ बलखंड माता के पीछे पांच से अधिक पत्थरों की अवैध खदानें चल रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां पर दिन में ही पत्थर निकाले जाते हैं। वहीं पर चीप पत्थर व पटिया पत्थर भी तैयार किए जाते हैं। इस क्षेत्र में बिरले-बिरले कई जगह पत्थर के ढेर लगे हैं।
ऐसा नहीं है वन भूमि को इसकी जानकारी नहीं लगती है, वन भूमि पर पत्थरों की अवैध खनन चलने की खबर पर जांच भी कराई जाती है, लेकिन मौके पर 10 से 30 पत्थरों के ढेर लगे होते हैं, जिससे वन विभाग को कार्रवाई करने लायक बड़ी खदान समझ में नहीं आती है, जिससे वन परिक्षेत्र की खदानों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है।
कम मात्रा में दिखने वाला बड़ा खनन
ग्रामीण बताते हैं कि वन परिक्षेत्र में चीप पत्थर का अवैध उत्खनन सालों से चल रहा है। यह उत्खनन मशीनों से न होकर हाथों से किया जाता है, आदिवासी मुड़ा समाज के एक दो लोग या महिलाएं छोटे पैमाने पर पत्थरों का अवैध उत्खनन करते हैं, फिर आधा एक किमी की दूरी पर 10 से लेकर 20 पत्थरों ढेरियां लगा देते हैं। जब व्यापक पैमाने पर पत्थर एकत्रित हो जाता है तो इसे हाथो से उठवाकर ट्रैक्टर ट्रालियों पर लोड कराकर रात के अंधेरे में उठा लिया जाता है।
दूसरे वन परिक्षेत्र में भी चल रहीं खदानें
ऐसा नहीं है कि इस तरह की खदानें सिर्फ दमोह वन परिक्षेत्र में ही चल रही हैं। सगौनी वन परिक्षेत्र के नोहटा व बनवार क्षेत्र में भी इस तरह की चीप पत्थर खदानें चल रही है। इस तरह बिरली खदानों के संबंध में वन विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है, लेकिन एक जगह बड़ी मात्रा में भारी तादाद पत्थर वन विभाग को नहीं मिल पाता है। छोटी खदान को नजर अंदाज किया जाता है।
वनरक्षकों की रहती है मिली भगत
अवैध रूप से चल रहीं खदानों के संबंध में ग्रामीणों का आरोप है कि बीटों के वन रक्षक को उनकी बीट में होने वाली एक-एक गतिविधि की जानकारी रहती है। इनके द्वारा इन गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाता है। ग्रामीणों की मानें तो इनकी बगैर मिलीभगत के इस तरह वन परिक्षेत्र में अवैध खदानों का संचालन नहीं हो सकता है।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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