10 लाख की फिरौती के लिए उठाया था अंश को

घर के सामने रहने वाला युवक निकला मास्टर माइंड, अपहृर्ताओं के मंसूबों पर फिरा पानी

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 04 Jan 2018, 01:21 PM IST

दमोह. बटियागढ़ की मुख्य सड़क से मंगलवार की शाम 5.45 बजे अपहृत किए गए अंश जैन के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता अर्जित कर ली है। घटना के तत्काल बाद ही पुलिस व परिजनों के एलर्ट होने से बड़ी अनहोनी टलने के साथ आरोपियों के गिरफ्त में आने से उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। वहीं बटियागढ़ व कोतवाली पुलिस को 35 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया है।
बटियागढ़ में मंगलवार की शाम को खेल रहे बच्चों में से एक बच्चे को पता बताने के बहाने कार सवारों ने अपने पास बुलाया फिर बच्चे की कॉलर पकड़कर उसे कार में डालकर स्पीड से बकायन की ओर भागने लगे जहां से अपनी कार फुटेराकला की ओर मोढ़ दी, जो एक पुलिया के पास टकरा गई थी। कार के टकराने के बाद आरोपी बच्चे को कार में छोड़कर बाहर निकले। इतने में फुटेराकला के दो युवक वहां पहुंचे जिन्हें अंश ने बताया कि वह बटियागढ़ का है और उसे जबरदस्ती उठाकर ले जा रहे थे। उन युवकों ने अपहर्ताओं जिसमें से एक घायल था उसे 108 की मदद से अस्पताल पहुंचाने की बात कही, लेकिन दोनों अपहृर्ता अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग गए। दोनों युवक बच्चे को फुटेराकला चौकी लेकर पहुंचे। इतने में बटियागढ़ पुलिस व परिजन बच्चे के पास पहुंच गए थे। परिजनों को बच्चा महज आधा घंटे में 6.30 बजे मिल गया था। अपहरण की इस घटना से परिजन भी हतप्रभ थे और पुलिस भी पशोपेश में थी। परिजनों और पुलिस ने अब पूरा ध्यान केंद्रित अपहृर्ताओं की खोज में लगा दिया। इस बीच दमोह कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली। जिसने बस स्टैंड के पास दो युवक को धरदबोचा। इनकी निशानदेही पर बटियागढ़ के मास्टर माइंड को भी गिरफ्त में ले लिया है।
एसपी विवेक अग्रवाल ने घटना के 24 घंटे के अंदर पुराने कंट्रोल रूम में बुधवार को 4.३० प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि अंश के अपहरण के बाद अपहृर्ता का हड़बड़ी में फुटेराकला रोड पर एक्सीडेंट हो गया था। कार नंबर की जानकारी लेने पर संतोष यादव जबलपुर के नाम पर पंजीकृत पाई गई। पुलिस लगातार अपहृर्ताओं पर नजर रख रही थी। जिसमें कार के नंबर व एक अपहर्ता के घायल होने की जानकारी पर संदिग्धों की तलाश में आरोपी सचिन यादव जिसके पिता की कार थी व घायल सूर्यभान ठाकुर जो हिरदेपुर पंचायत के सचिव का पुत्र है। इन्हें पकड़ा गया। शुरुआती दौर में दोनों पुलिस को गुमराह करते रहे, फिर अपना अपराध कबूलते हुए तीसरे आरोपी बटियागढ़ निवासी लोकेंद्र सिंह के बारे में पूरी जानकारी दी। गई। सचिन व सूर्यभान दमोह के पीजी कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र हैं, जबकि लोकेंद्र की बुआ का लड़का सूर्यभान है। बटियागढ़ निवासी लोकेंद्र के पिता अजमेर तहसील में अर्जी नवीस हैं। जिनके लीवर खराब बताए जा रहे हैं। लोकेंद्र ने उन्हीं के इलाज के लिए 10 लाख रुपए की फिरौती की योजना बनाई थी। सचिन व सूर्यभान ने कर्ज व महंगे शौकों के कारण इस घटना को अंजाम देने के लिए शामिल हुए थे। सचिन यादव के पिता संतोष यादव का ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय है। अपहृर्ता बालक को नौरुमारा में किसी घर में रखने की फिराक में थे, जब तक फिरौती नहीं मिल जाती। एसपी विवेक अग्रवाल ने कहा है कि अपने नाबालिग बच्चे को कार देने के मामले में सचिन के पिता संतोष यादव को भी मामले में आरोपी बनाया जाएगा, ताकि इससे नसीहत जाए कि नाबालिग बच्चों के हाथ में वाहन न दें और न ही वे गलत संगत में पड़कर ऐसे अपराधों की ओर अग्रसर हों।
इधर बंधाता रहा ढाढस उधर मोबाइल पर देता रहा निर्देश
अपहृत बालक के पिता अभिनंदन जैन व बड़े पापा अजित जैन ने बताया कि जब अंश का अपहरण हुआ था तो मास्टर माइंड लोकेंद्र उनके पास आकर ढाढस बंधाता रहा। उधर मोबाइल से दोनों अपहृर्ताओं को परिजनों द्वारा की जा रही कार्रवाई की जानकारी देता रहा। उसने ही अपहृर्ताओं को बकायन से फुटेरा गांव की ओर मुढऩे के निर्देश दिए थे। अजित जैन ने बताया कि लोकेंद्र के पिता अजमेर बुधवार की सुबह उनके घर आए और उन्होंने बताया कि उनके बेटे को पुलिस ने पकड़ लिया है। लोकेंद्र उनकी इकलौती संतान है। अभिनंदन जैन ने बताया कि बोलचाल और व्यवहार से लोकेंद्र के खतरनाक मसूंबों का कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता है, लेकिन वह 15 दिन इंदौर में रहता है और गांव वालों से धोखाधड़ी कर रुपए ऐंठने के कई मामले में बदनाम हो चुका है।
मैंने रोते हुए दो अंकल से ली मदद
अंश ने कहा कि जब मैं खेल रहा था एक तेज गति कार पहले आगे बढ़ी फिर बैक होकर आई। जिसमें से एक अंकल ने पता पूछने के बहाने बुलाया और कॉलर पकड़कर कार में डाल दिया और गाड़ी आगे बढ़ा दी। मैंने कहा छोड़ दो तो उनने कहा कि बुआ के पास छोड़ देंगे जब गाड़ी भिड़ी और एक अंकल घायल हो गए थे तभी पीछे बाइक से आ रहे अंकल को बताया जिन्होंने तत्काल गोदी में लेकर पुलिस के पास ले गए थे। मुझे रोता देख दोनों अंकल ने मदद की थी। अंश ने कहा न ही मेरा मुंह बांधा गया और न ही मुझे बोरे में डाला गया था। जिससे में रास्ते भर चीखता हुआ रोता रहा।
बटियागढ़ व कोतवाली पुलिस को संयुक्त इनाम
एसपी विवेक अग्रवाल ने कहा कि नव वर्ष पर बटियागढ़ व कोतवाली पुलिस ने संयुक्त रूप व समन्वय से अच्छा काम किया है। जिससे मेरे द्वारा 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय स्तर से भी 25 हजार रुपए इनाम घोषित किया गया है। इस तरह जिले की पुलिस को पहली बार 35 हजार रुपए एक बड़ी इनाम राशि बटियागढ़ थाना पुलिस व कोतवाली पुलिस के सहभागिता निभाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को दी जाएगी।

Patrika
Rajesh Kumar Pandey Desk
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